भोपाल। मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनवा को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल चरम पर है। दिल्ली में आलाकमान के स्तर पर मंथन का दौर पूरा हो चुका है और माना जा रहा है कि आज या कल में उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक एलान हो सकता है। 18 जून को होने वाले इस चुनाव को लेकर तीन सीटों पर मुकाबले से ज्यादा दोनों दलों के संभावित चेहरों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं।

दिल्ली प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव

इस बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी दिल्ली दौरे पर हैं। जिसे इन नामों पर अंतिम मुहर और संगठन की चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और केंद्रीय मंत्रियों से मिलाकात कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के इस दौरे को राज्य की सियासत और विकास कार्यों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

भाजपा की रणनीति पर सबकी नजर

राजनीति के इतिहास में अतीत के पन्नों को पलटकर देखा जाए तो कई राज्यों में राज्यसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी आखिरी समय में अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर विपक्ष के समीकरण को बिगाड़ चुकी है। पार्टी ने कई मौकों पर संख्या बल कम होने के बावजूद रणनीतिक तरीके से मुकाबला खड़ा किया और क्रॉस वोटिंग के सहारे जीत हासिल की है।

कांग्रेस में दिग्गजों के नामों पर चर्चा, लेकिन कमलनाथ की अटकलें तेज

राज्यसभा उम्मीदवारों की रेस में इस बार कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ी अटकल पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम को लेकर लगाई जा रही है। चर्चा है कि कांग्रेस उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार बना सकती है, जिससे पार्टी में एक बार फिर नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।

राजनीतिक सेंधमारी के डर से कांग्रेस सावधान

भाजपा की संभावति रणनीति को देखते हुए कांग्रेस भी उम्मीदवार चयन को लेकर बेहद सतर्क है। पार्टी एक ऐसे चेहरे पर फोकस कर रही है जो न केवल विधायकों को एकजुट रख सके, बल्कि किसी भी तरह की राजनीतिक सेंधमारी से भी बच सके। ऐसे में आगामी दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ प्रदेश की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल सकती है।

सीटों का गणित लगभग तय: बीजेपी की 2 और कांग्रेस की 1 सीट

विधानसभा में विधायकों की संख्या बल के हिसाब से राज्य की 3 सीटों का समीकरण पूरी तरह साफ है। इसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में 2 सीटें और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पाले में 1 सीट जाना लगभग तय माना जा रहा है। अब दोनों ही खेमों में केवल अंतिम चेहरों की घोषणा का इंतजार है।

जीत के लिए कितने विधायक चाहिए

मध्य प्रदेश में विधानसभा में कुल 230 सीट हैं। जिसमें बीजेपी के पास 164 सीट तो वहीं कांग्रेस 64 सीट पर काबिज है। भारत आदिवासी पार्टी के पास एक सीट है, जबकि एक सीट रिक्त है। आपको बता दें कि राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 58 वोट की जरूरत होती है। भारतीय जनता द्वारा दो सीटों पर जीत के बाद केवल 48 सीटें बचेंगी। कांग्रेस के पास 64 सीट हैं।

क्यों बदल रहे समीकरण?

भारतीय जनता पार्टी के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने की मुख्य वजह संख्याबल है। हर एक सीट के लिए 58 वोटों की जरूरत पड़ती है। जबकि तीसरी सीट के लिए बीजेपी के पास केवल 48 वोट हैं और कांग्रेस के पास 64 वोट हैं। बीजेपी अगर तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारती है तो जीत के लिए विपक्षी पार्टी के 10 विधायकों का समर्थन उन्हें चाहिए।

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