केरल में राष्ट्रीय प्रतीकों और सरकारी कार्यक्रमों को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। स्वतंत्रता दिवस समारोहों में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाने को लेकर जारी निर्देश पर पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता पिनाराई विजयन ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे RSS के एजेंडे को लागू करने की कोशिश बताते हुए फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है।

पूरे ‘वंदे मातरम्’ के गायन पर विजयन की आपत्ति

पिनाराई विजयन ने कहा कि देश में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान ‘वंदे मातरम्’ की पूरी रचना को अनिवार्य रूप से गाने की परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर इसके शुरुआती दो अंतरों का ही इस्तेमाल सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में किया जाता रहा है। विजयन ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक दबाव में आकर पहले से चले आ रहे तौर-तरीकों में बदलाव कर रही है।

कांग्रेस और यूडीएफ सरकार पर भी निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ के पूरे संस्करण को सरकारी कार्यक्रमों में अपनाना कांग्रेस की कथित धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के अनुरूप नहीं है।

विजयन ने चेतावनी दी कि ऐसे फैसलों से समाज के कुछ वर्गों में अलगाव की भावना पैदा हो सकती है और केरल के सार्वजनिक कार्यक्रमों की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति प्रभावित हो सकती है।

6 अगस्त के पत्र से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत 6 अगस्त को केरल के मुख्य सचिव बिश्वनाथ सिन्हा की ओर से जारी पत्र के बाद हुई। यह पत्र केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की ओर से भेजे गए एक संचार के बाद जारी किया गया था। इसमें ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की बात कही गई है।

इस बीच, ‘वंदे मातरम्’ को लेकर मुस्लिम संगठनों और नेताओं की ओर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इससे केरल में राष्ट्रीय प्रतीकों, धर्मनिरपेक्षता और राजनीतिक विचारधारा को लेकर बहस और तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि क्या केरल सरकार इन निर्देशों को लागू रखेगी या विपक्ष के दबाव के बाद अपने फैसले में बदलाव करेगी।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m