राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में निगम, मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण और आयोगों में नियुक्त मंत्री दर्जा प्राप्त नेताओं को लेकर सरकार और संगठन बेहद सख्त रुख अपनाने जा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में संपन्न हुई एक अहम बैठक में इन नेताओं को स्पष्ट और कड़े शब्दों में चेतावनी दी गई है कि वे अपने Routine कामकाज और फैसलों में अपने परिवार के सदस्यों को पूरी तरह दूर रखें। शासकीय कार्यों में परिजनों का किसी भी तरह का दखल (इन्वॉल्वमेंट) कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्यवहार की रिपोर्ट तैयार की जाएगी
इस बैठक के बाद गलियारों में साफ संदेश चला गया है कि अब केवल पद पा लेना काफी नहीं होगा, बल्कि जनता के बीच आपका व्यवहार और काम ही आपकी कुर्सी तय करेगा। बैठक में नेताओं के काम करने के तरीके को लेकर कई नए और कड़े नियम तय किए गए हैं। अब सभी मंत्री दर्जा प्राप्त नेताओं के रूटीन कामकाज के साथ-साथ जनता और कार्यकर्ताओं के प्रति उनके व्यवहार की भी बाकायदा रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
धार भोजशाला में रचेगा इतिहास: हाईकोर्ट के फैसले के बाद 721 साल में पहली बार शुक्रवार को होगी महाआरती
जिलों में रुकने की व्यवस्था को लेकर नाराजगी
नेताओं के परफॉर्मेंस का आकलन हर महीने किया जाएगा। खास बात यह है कि यह मूल्यांकन सिर्फ सरकार स्तर पर नहीं, बल्कि संगठन (पार्टी) के स्तर पर भी समानांतर रूप से किया जाएगा। बैठक में मंत्रियों के दौरों और जिलों में रुकने की व्यवस्था को लेकर भी भारी नाराजगी जताई गई है।
MP में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी के नए नियम तय: वित्त विभाग ने जारी किया आदेश,
मंत्रियों की परफॉर्मेंस को सुधारना
नेताओं और मंत्रियों को दो टूक कह दिया गया है कि वे केवल कागजी दौरे न करें। उन्हें हर हाल में जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करना होगा और रात भी गांवों में ही गुजारनी (रात्रि विश्राम) होगी। इस कड़े कदम के पीछे सरकार की मंशा जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना और मंत्रियों की परफॉर्मेंस को सुधारना है, ताकि जनता के बीच सरकार की छवि को और बेहतर बनाया जा सके।


