Dharm Desk – नवजात शिशु का जन्म हर परिवार के लिए खुशियों का अवसर होता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर जन्म का समय समान रूप से शुभ नहीं माना जाता. यदि बच्चे का जन्म कुछ विशेष तिथि, नक्षत्र या योग में होता है तो उसे दोषयुक्त माना जाता है. इन दोषों को दूर करने के लिए ‘जनन शांति’ का विधान बताया है, जिसे शिशु और परिवार दोनों के लिए आवश्यक माना जाता है.

अशुभ तिथि और नक्षत्र
ज्योतिष के अनुसा कृष्ण चतुर्दशी, अमावस्या और क्षय तिथि में जन्म को अशुभ माना जाता है. वहीं अश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल जैसे नक्षत्रों में जन्म लेने पर भी दोष लगने की मान्यता है. इसके अलावा कुछ नक्षत्रों के विशेष चरण, जैसे मघा का प्रथम चरण या चित्रा के प्रारंभिक चरण भी संवेदनशील माने जाते है.
क्या होते हैं अशोक योग?
‘अशोक योग’ उन विशेष स्थितियों को कहा जाता है जब शिशु का जन्म दिन के समय होता है. शास्त्रों में है कि दिन में जन्म लेने वाले बच्चों पर ग्रहों का प्रभाव अलग प्रकार से पड़ता है. जिससे जीवन में कुछ असंतुलन या बाधाएं आ सकती हैं. ऐसे मामलों में जनन शांति करवाना आवश्यक बताया गया है, ताकि इन संभावित दोषों का प्रभाव कम किया जा सके.
अन्य अशुभ योग और करण
वैधृति, व्यतीपात, दग्ध योग, यमघंट योग और मृत्यु योग जैसे योगों में जन्म को भी अशुभ बता है. वहीं विष्टी करण (भद्रा) और ग्रहण काल या सूर्य संक्रांति के समय जन्म भी विशेष परिस्थितियों में दोष उत्पन्न कर सकता है. इन सभी स्थितियों में जनन शांति का विशेष महत्व होता है.
परिवार पर पड़ने वाला प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार, अशुभ योग में जन्मे शिशु के ग्रहों का प्रभाव केवल बच्चे तक सीमित नहीं रहता. इसका असर माता-पिता के स्वास्थ्य, परिवार की आर्थिक स्थिति और घर की सुख-शांति पर भी पड़ सकता है. इसलिए इस नकारात्मकता को दूर करना आवश्यक है.
जनन शांति का उद्देश्य और लाभ
जनन शांति का मुख्य उद्देश्य इन दोषों को शांत कर शिशु के जीवन को सुरक्षित बनाना है. यह अनुष्ठान बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए किया जाता है. जिससे उसके जीवन में आने वाली बाधाएं कम हों और उसे शिक्षा, स्वास्थ्य, धन और यश की प्राप्ति हो सके.
कब और कैसे होती है जनन शांति
यह पूजा सामान्यतः जन्म के 12वें दिन या उसी नक्षत्र के पुनः आने पर की जाती है. इसमें विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और ग्रह-देवताओं की पूजा की जाती है. इस प्रक्रिया के माध्यम से ग्रहों की शांति कर नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने का प्रयास किया जाता.

