राकेश चतुर्वेदी की कलम से

आंदोलन रुकवाने विधायक ने मंत्री से कर दी मनाही

मध्य प्रदेश में चले रहे विभागीय आंदोलन से सबसे अधिक परेशान विभागीय मंत्री हैं. मंत्रीजी ने संघ को साधने का रास्ता तलाशा तो पता चला कि संघ के मुख्य कर्ताधर्ता जिले के बीजेपी विधायकजी के बेहद करीबी हैं। मतलब साफ था—जहां मंत्रीजी की बात शायद थोड़ी दूर तक जाए, वहां विधायकजी की बात सीधे दिल और घर तक पहुंचेगी.बस फिर क्या था, मंत्रीजी ने बड़े कॉन्फिडेंस के साथ विधायकजी को फोन लगा दिया.मंत्रीजी ने पूरी बात समझाते हुए कहा कि अपने खास कर्मचारी नेता को समझाइए और आंदोलन रफा-दफा करवाइए. उधर विधायकजी फोन पर काफी देर तक सोचते रहे.

मामला था तो आंदोलन का, लेकिन हिसाब-किताब राजनीति कर ही लगाया गया.कुछ देर बाद विधायकजी ने ऐसा जवाब दिया कि मंत्रीजी का कॉन्फिडेंस ही हल्का पड़ गया. फोन रखते-रखते विधायज ने कह दिया कि वो तो कब से प्रयासरत हैं, कर्मचारी नेता बहुत ही अड़ियल हैं. फिर भी एक बार और समझाइश का प्रयास करूंगा, लेकिन रिजल्ट पता है वो सुनने वाले नहीं. फोन रखते-रखते मंत्री भी समझ गए कि राजनीति से कोई भी अछूता नहीं है. जानकारी के लिए बता दें विधायकजी बड़े कारोबारी हैं.

जहां हैं, वहीं देख लें औचक निरीक्षण की जरूरत ही नहीं

मंत्रियों को औचक निरीक्षण पर भेजने का फैसला हुआ है. मंत्रीजी कब निकलेंगे, यह तय है, लेकिन कहां पहुंचेंगे, यह औचक ही पता चलेगा. मकसद साफ है कि जमीनी हकीकत देखना, खामियां पकड़ना और मौके पर ही जिम्मेदारों पर एक्शन लेना.
फैसला सुनने में जितना शानदार है, एक कार्यालय में इसकी चर्चा उससे भी ज्यादा दिलचस्प हुई. शेड्यूल की भनक लगते ही एक कर्मचारी ने दूसरे से कहा—भाई, शुरुआत तो गड्ढों वाले मंत्रीजी से हो रही है. अब इन्हें औचक निरीक्षण पर जाने की जरूरत ही क्या है.

मंत्रीजी प्रदेश में कहीं भी निकल जाएं, सड़क खुद बता देगी कि निरीक्षण यहीं कर लो. बात आगे बढ़ी तो किसी ने कहा- औचक निरीक्षण में जगह अचानक चुननी पड़ती है, लेकिन एक भी सड़क ऐसी नहीं जहां गड्ढे न हों. आंख बंद करके भी किसी सड़क पर उतर जाओ निरीक्षण अपने आप शुरू हो जाएगा. एक नए तो यहां तक कह दिया मंत्रीजी के दौरे में सबसे पहले क्या मिलेगा-खामी, अधिकारी या गड्ढा? अब दिलचस्प यह होगा कि औचक निरीक्षण के लिए कौन से स्थान का चयन किया जाता है.

संगठन महामंत्री के लिए दिल्ली कनेक्शन

मध्य प्रदेश बीजेपी में खाली चल रही संगठन महामंत्री की कुर्सी पर ताजपोशी तो होगी ही और इसके लिए तीन से चार नामों की चर्चा लंबे समय से चल रही है. लेकिन कब और कौन आएगा, अभी भी यह अटकलों तक ही सीमित है. इस बीच नई गॉशिप दिल्ली कनेक्शन को लेकर सामने आई है. केंद्रीय टीम में नया और बड़ा स्थान पाने वाले संगठन के लीडर से यह सब जोड़कर देखा जा रहा है. नए सिरे से चर्चा का ये दौर तब और तेजी से चल पड़ा है जब लीडर के चहेते के करीबी यहां तक दावा करने लगे कि दो से तीन बार की बातचीत तो हो चुकी है. लीडर ने पूरी तरह हिंट भी कर दिया है. देरी है तो बस समय पाबंद होने की. यह चर्चा अब प्रमुख कार्यालयों तक भी पहुचने लगी है. कहा यह भी जा रहा है कि संबंधों का रायता ज्यादा ढुल गया तो फिर लीडर तो लीडर हैं. ऐन मौके पर हाथ भी खींच सकते हैं.

भोपाल दर्शन कराने वाली बस को सैर का इंतजार

कभी पर्यटकों को भोपाल का दर्शन कराने वाली बस अब खुद सैर-सपाटे के इंतजार में खड़ी है. साल 2008 में शुरू हुई बस पिछले दो साल से एक ही जगह पर खड़ी-खड़ी शायद यही सोच रही है कि आखिर उसका अगला सफर कब शुरू होगा.
कभी इसमें बैठकर करीब 30 पर्यटक भोपाल की खूबसूरती निहारा करते थे. जनजातीय संग्रहालय से लेकर भारत भवन, ताजुल मसाजिद और बिरला मंदिर जैसे पर्यटक स्थलों सब यह बस घुमाती थी. अब हालात ऐसे हैं कि बस खुद सैर-सपाटे के पास खड़ी है और आने-जाने वालों को अपना दर्शन करा रही है.तीन-चार घंटे में भोपाल दर्शन कराने वाली इस बस की अपनी यात्रा फिलहाल वहीं थम गई है. इसमें सफर कभी 100 रुपए से शुरू हुआ था, बाद में 250 रुपए तक पहुंचा, लेकिन अब किराया कितना होगा, यह सवाल भी बेमानी है, क्योंकि सफर ही बंद है.

रजिस्ट्रेशन की मियाद खत्म हुई तो बस भी जैसे प्रशासन से कह रही हो साहब, चलने की इजाजत मिले तो बताइएगा. तब तक यहीं खड़ी हूं मैं. मजेदार बात यह है कि भोपाल के पर्यटन स्थल लगातार पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं. शहर में घूमने-फिरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. लेकिन जिस बस का काम पर्यटकों को पर्यटन स्थलों तक पहुंचाना था, वह खुद पर्यटन स्थल की तरह खड़ी हो गई है. फिलहाल भोपाल दर्शन कराने वाली इस बस के हिस्से में सफर नहीं, सिर्फ ठहराव है. अब देखना दिलचस्प होगा कि यह बस कभी फिर पर्यटकों को भोपाल दर्शन कराएगी या फिर आने वाले समय में इसका ही सबसे अधिक समय तक खड़ी रहने का ही रिकॉर्ड बन जाएगा.

जेन जी और जेन अल्फा पर BJP का फोकस

ओरछा में प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक आज से शुरू होगी. दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में जेन जी और जेन अल्फा को संगठन से जोड़ने की रणनीति पर भी मंथन होगा. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल टीम की पहली प्रदेश कार्यसमिति बैठक में युवा पीढ़ी को पार्टी से जोड़ने और इनमें अपनी पैठ बढ़ाने को लेकर चर्चा हो सकती है. पिछले कुछ महीनों में जेन जी और जेन अल्फा की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है. साथ ही प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में करीब तीन राजनीतिक और संगठनात्मक प्रस्ताव आने की संभावना है. इनमें प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, केंद्र के साथ राज्य सरकार की उपलब्धियों और आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं.

प्रस्तावों के साथ पार्टी आने वाले महीनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण संकल्प भी ले सकती है.सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक और प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर खास जोर रहेगा.संगठन के जिला से लेकर बूथ स्तर तक सरकार के कामकाज की जानकारी पहुंचाने और कार्यकर्ताओं का लाभार्थियों से सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है. यानी ओरछा की बैठक में सिर्फ संगठन की मजबूती नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक बीजेपी की पहुंच बढ़ाने का रोडमैप भी तैयार हो सकता है.

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