राकेश चतुर्वेदी की कलम से
आ रहे हैं संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश के सत्ताधारी संगठन में लंबे समय से खाली पड़ा संगठन महामंत्री का पद जल्द भर सकता है. संघ की ओर से प्रदेश को संगठन महामंत्री देने पर गहन मंथन हो रहा है. भोपाल में शुरू हुई संघ की बैठक में भी इस बात पर चर्चा होने के संकेत मिले हैं. संगठन महामंत्री पद के लिए फिलहाल तीन से चार नामों पर विचार होना बताया जा रहा है. पॉवर गोसिप की खबर ये है जिन नामों पर मंथन हुआ है उनसे हटकर अन्य किसी नाम पर ही मुहर लगेगी. संगठन महामंत्री जल्द मिलने की बात पर इसलिए भी जोर है क्योंकि मंथन के बीच इस बात का जिक्र हुआ है कि समन्वय, प्रतिनिधित्व और मंशा अनुरूप गाइडलाइन के लिए और अधिक समय तक इस पद को खाली रखा जाना उचित नहीं है.
विधायकों को कर्नाटक भेजने के लिए दो दिग्गज नहीं थे सहमत
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए हाईकमान ने कांग्रेस विधायकों को कर्नाटक भेजना तय किया तो मध्य प्रदेश के दो दिग्गज नेता इससे सहमत नहीं थे. दोनों नेताओं ने बारी-बारी से हाईकमान से कहा कि कर्नाटक भेजने या न भेजने से कोई अंदर नहीं आएगा. जहां तक रही क्रॉस वोटिंग रोकने की बात तो विधायकों को भोपाल में ही रोककर वो सब किया जा सकता है जो कर्नाटक भेजने से होगा. बड़ी बात ये है कि दिल्ली हाईकमान को यह सुझाव रास नहीं आया और दोनों की ही राय अनसुना कर विधायकों को कर्नाटक भेजने का फैसला ले लिया गया.
ये भी पढ़ें: पॉवर गॉसिप: जीत के लिए IAS तैयार कर रहे हैं फॉर्मूला… 50 लाख का थाना… पानी का टैक्स या राजनीति की प्यास? महाराज के क्लब में हाफ फ्राई का हाई-वोल्टेज ड्रामा, पूरे शहर में चर्चा!
साहब से उम्मीद अभी भी बरकरार
कहानी एक ऐसे आईएएस अफसर की है मानो जिनके जीवन का उद्देश्य ही कलेक्टरी करना है, लेकिन किसी ऐसे-वैसे जिले में तैनात नहीं रहना. मनपसंद जिलों की उम्मीद में साहब ने कई ऑफर इसलिए भी स्वीकार नहीं किए क्योंकि उन्हें लगता था जब साहब से ही सीधा संपर्क है तो फिर काहे की झंझट. इधर, इंतजार-इंतजार करते-करते साहब के रिटायरमेंट का समय नजदीक आ रहा है तो आईएएस की आंखें अब जाकर खुलने तो लगी हैं, लेकिन अभी भी चहेते जिले को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते. बेच मेटस मिल जाएं तो तेवर वही रहते हैं कि साहब के जाते-जाते ही सही जिला तो मन-पसंद ही मिलकर रहेगा.
ये भी पढ़ें: पॉवर गॉसिप : कोर्ट में पहुंची मंत्रीजी के ओएसडी की शिकायत…जिलों से अधिक मुख्यालय में स्कूलों का लेखा-जोखा…कलेक्टर को फ्लैट का धोखा…’मुखबिर’ का पता लगाने में जुटी कांग्रेस…
दोष किसी और को क्या देना, खुद को ही दूंगा
मध्य प्रदेश के दौरे पर आए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अपनों के बीच ऐसी स्वीकारोक्ती की कि पार्टी के नेता सन्न रह गए. धर्मेंद्र प्रधान पार्टी के कार्यकर्ता और नेताओं से चर्चा कर रहे थे. इसी बीच नेताजी के मुंह से निकल गया कि नीट परीक्षा को लेकर विपक्ष मोर्चा खोले हुए है, इसमें आपका दोष थोड़े ही है. मंत्रीजी ने नेताजी के मन को भांपा और तपाक से बोल पड़े दोष किसी और को क्या देना, मैं तो खुद को ही दूंगा न. यह भी सुनिश्चित करना ही होगा कि आगे से इस तरह का दोहराव न हो. उन्होंने ये भी कहा कि इसकी भरपाई इस तरह से की जा रही है कि छात्रों को पुरानी फीस तो लौटाई ही जा रही है. साथ ही नए सिरे से परीक्षा में बैठने के लिए किसी भी तरह की परीक्षा फीस नहीं ली जाएगी.

