शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। प्रदेश में 10 साल बाद प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। इसे लेकर सरकार ने निर्देश जारी कर दिए हैं। यह फैसला महाधिवक्ता की कानूनी राय मिलने के बाद लिया गया है। सरकार ने प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

करीब एक दशक से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सभी विभागों, विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किये है। जीएडी ने सभी विभागों, एसीएस, विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को पत्र जारी किया है। महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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HC-SC के अंतिम फैसले के अधीन होंगे प्रमोशन

हाईकोर्ट ने प्रमोशन नियम-2025 पर कोई स्टे नहीं लगाया है। विभागीय पदोन्नति समितियां (DPC) अब बैठकें कर सकेंगी। सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होंगे। भविष्य में अदालत का फैसला अलग आने पर उसी के अनुसार कार्रवाई होगी।

सरकार का तर्क

सरकार का तर्क है कि प्रमोशन नहीं होने से उच्च पद बड़ी संख्या में खाली हैं। कई विभाग सिर्फ 40% स्वीकृत क्षमता पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों की कमी से प्रशासनिक कामकाज और नई भर्तियां प्रभावित हो रही हैं। लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

4.5 लाख कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में मई 2016 से सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति पर पूरी तरह से रोक लगी हुई थी। इस रोक के कारण लाखों कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त (रिटायर) हो रहे थे। अब सरकार के इस कदम से राज्य के करीब 4 लाख 50 हजार सरकारी कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका सालों पुराना इंतजार खत्म होगा।

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युवाओं के लिए खुलेंगे बंपर नौकरियों के रास्ते

कर्मचारियों के प्रमोशन होने से सिर्फ पुराना स्टाफ ही खुश नहीं होगा, बल्कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के लिए भी यह एक बड़ी खुशखबरी है। पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होते ही निचले और मध्य स्तर के करीब 2 लाख पद खाली हो जाएंगे। इन खाली पदों को भरने के लिए सरकार जल्द ही नई भर्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर सकती है, जिससे युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का रास्ता साफ होगा।

सीएम डॉ मोहन यादव का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने साल 2025 में ही यह साफ कर दिया था कि कर्मचारियों के हित में पदोन्नति की प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाएगा। 29 जून को हुई बैठक के बाद लिए गए फैसले को इसी दिशा में सरकार का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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