सतीश सिंह, लखनऊ. बाजार से खरीदा गया दूध, पनीर, खोवा या क्रीम असली है या फिर तेल, डिटर्जेंट और केमिकल से तैयार ‘नकली माल’, इसकी चिंता करने वाले उपभोक्ताओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब दूध में मिलावट पकड़े जाने पर सिर्फ नमूना भरकर जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं होगा. डेयरी में खतरनाक रसायन मिला तो पूरी यूनिट का माल जब्त होगा, उत्पादन बंद होगा और लाइसेंस भी निलंबित किया जा सकेगा. खाद्य सुरक्षा विभाग के इस आदेश ने मिलावटखोरों के लिए कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है. खास बात यह है कि निशाने पर सिर्फ दूध बेचने वाला प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि पूरे ब्रांड की सप्लाई चेन होगी.

दूध में तेल से लेकर डिटर्जेंट तक

विभाग की तरफ से अब तक की गई कार्रवाई में कई दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है, जिन्हें सुनकर आम उपभोक्ता भी चौंक सकता है. आदेश में रिफाइंड तेल एवं वसा, सोयाबीन उत्पाद, टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज और हाइड्रोजन परॉक्साइड समेत कई रसायनों का उल्लेख किया गया है. इनका इस्तेमाल दूध और दुग्ध उत्पादों का रंग, गाढ़ापन, बनावट या अन्य गुण बदलकर उन्हें वास्तविक उत्पाद जैसा दिखाने के लिए किया जा सकता है. यानी कम लागत में ज्यादा उत्पादन और ज्यादा मुनाफे के लालच में उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ का आरोप सामने आया है.

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खाद्य आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के स्तर से जारी नए आदेश का सबसे बड़ा संदेश यही है कि अगर निर्माण इकाई में खतरनाक रसायन या विजातीय वसा मिलती है तो कार्रवाई केवल एक संदिग्ध उत्पाद तक सीमित नहीं रहेगी. बल्कि इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 34 के तहत तत्काल प्रतिषेध आदेश जारी कर उत्पादन बंद कराया जा सकता है. मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण तत्काल निलंबित किया जा सकता है. इससे भी आगे बढ़कर संबंधित ब्रांड की बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जा सकेगा. यानी किसी एक फैक्ट्री में गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई सिर्फ उसी परिसर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बाजार में उसी ब्रांड के उत्पादों की बिक्री पर भी असर पड़ेगा.

दूसरे राज्यों से आने वाले माल पर भी नजर

उत्तर प्रदेश के बाहर बनी डेयरी उत्पादों में यदि हानिकारक रसायन या विजातीय वसा की पुष्टि होती है तो उस ब्रांड की बिक्री पर भी प्रदेशव्यापी प्रतिबंध लगाया जाएगा. इससे दूसरे राज्यों से आने वाले दूध, पनीर, खोवा, क्रीम और अन्य दुग्ध उत्पाद भी खाद्य सुरक्षा जांच के दायरे में रहेंगे.

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मिलावट संगठित मिली तो सीधे एफआईआर

सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल संगठित तरीके से किया जाता पाया गया तो संबंधित लोगों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी. इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. इसका सीधा संदेश है कि दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट कर मुनाफा कमाने वालों के लिए अब सिर्फ जुर्माना नहीं, बल्कि पूरी कारोबारी चेन पर कार्रवाई का रास्ता खुल गया है.