सत्या राजपूत, रायपुर. प्रधानमंत्री मोदी की देशहित में ईंधन बचत की अपील का असर देखने को मिल रहा है. छत्तीसगढ़ में एक ओर मंत्रियों के काफिले में कटौती की जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ आम जनता में नाराजगी भी नजर आने लगी है. खराब पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था और वीआईपी कल्चर के साथ ईंधन बचत की अपील को लेकर लोग आक्रोशित हैं.
पीएम की अपील पर आमजनता की नाराजगी
नरेश साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल की अपील कर रहे हैं, लेकिन राज्य में सिटी बसों का संचालन ऊंट के मुंह में जीरा है. उन्होंने कहा कि आज हर हाथ में गाड़ी होने के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है. अगर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बेहतर होती तो लोग धूप, बारिश और ठंड में अपनी गाड़ियां लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर नहीं होते. उन्होंने लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं के लिए भी सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
राम कुमार देवांगन ने कहा कि पहले रायपुर की सड़कों पर कुछ सिटी बसें दिखाई देती थीं, लेकिन अब वह भी पंडरी में धूल खा रही हैं. आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार निजी बस ट्रांसपोर्टरों के सामने नतमस्तक हो गई है, जिसकी वजह से आम जनता को बेहतर परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही. वीआईपी काफीने के एक दिन का खर्चा, टूव्हीलर के कई महीनों के ईंधन है.
VIP कल्चर पर सवाल
अंकिता शर्मा ने राज्य में वीआईपी कल्चर पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रालय और संचालनालय के कर्मचारियों के लिए करीब 100 सिटी बसों का संचालन किया जाता है, लेकिन IAS और IPS अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों से सफर करते हैं. उन्होंने कहा कि जब सिटी बसें उपलब्ध हैं तो अधिकारियों को सिंगल गाड़ियों से आने-जाने की जरूरत क्यों पड़ती है. सबसे पहले इस व्यवस्था पर रोक लगनी चाहिए.
काफिला घटाने का नाटक कर रहे हैं मंत्री-विधायक
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के आह्वान के बाद कई अधिकारी और नेता के साइकिल से दफ्तर पहुंचने का वीडियो वायरल हो रहा है. मुकेश कुमार का कहना है कि सोशल मीडिया में मंत्री और विधायक साइकिल से चलने या काफिला घटाने का नाटक कर रहे हैं. क्या वाकई में जितने दिन तक का प्रधानमंत्री ने आह्वान किया है, उतने दिन साइकल में चलने या काफिला घटाने से संकट दूर हो जाएगा. यह नौटंकी ज्यादा दिन तो नहीं चलेगी.
मंत्री-विधायकों के परिवारों को आसानी से मिल रहा ईंधन
आशुतोष बंजारे ने पेट्रोल पंपों की स्थिति पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि उनकी भांजी अस्पताल में भर्ती है और वह टू-व्हीलर में पेट्रोल भरवाने के लिए डेढ़-दो घंटे से लाइन में लगे हैं. वहीं दूसरी ओर मंत्री-विधायकों के परिवारों और सरकारी वाहनों में आसानी से ईंधन भरा जा रहा है. उन्होंने इसे आम जनता के साथ भेदभाव बताया.
रोज कमाने-खाने वालों के लिए ईंधन बेहद जरूरी
दूसरे जिले से पढ़ाई करने आई ऐश्वर्या जायसवाल ने कहा कि अनावश्यक ईंधन खर्च नहीं होना चाहिए, लेकिन रोज कमाने-खाने वाले लोगों के लिए ईंधन बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि उन्हें पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा तो उनके परिवारों का गुजारा मुश्किल हो जाएगा.
खेती और उत्पादन प्रभावित होने की चेतावनी
किसान नेता पारसनाथ साहू ने चेतावनी दी कि यदि किसानों को समय पर डीजल और खाद नहीं मिला तो इस साल खेती और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि खेत की जुताई, निंदाई और अन्य कृषि कार्य ट्रैक्टरों पर निर्भर हैं. ऐसे में ईंधन संकट किसानों को कर्ज में डुबो सकता है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि उत्पादन घटने से महंगाई और खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी बढ़ेगी. पारसनाथ साहू ने कहा कि खेती समय पर आधारित व्यवस्था है और यदि समय पर खाद, बीज और डीजल नहीं मिला तो इतना नुकसान हो सकता है, जिसका आकलन करना भी मुश्किल होगा.

