चंडीगढ़। पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने राज्य के अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए निजी शैक्षणिक संस्थानों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर पूरी तरह लगाम कस दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लेते हुए फीस नियंत्रण अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) को मंजूरी दे दी गई है।

चूंकि इस समय विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है, इसलिए इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा गया है। कैबिनेट बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस ऐतिहासिक फैसले की विस्तृत जानकारी साझा की।

लूट-खसूट होगी बंद, वापस करना होगा ज्यादा वसूला गया पैसा

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि अब पंजाब का कोई भी निजी स्कूल या शैक्षणिक संस्थान सालाना 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। इस कानून के लागू होने के बाद स्कूलों द्वारा अभिभावकों से की जाने वाली लूट-खसूट पूरी तरह बंद हो जाएगी। उन्होंने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल ने पिछले 36 महीनों (3 साल) में 15 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो उसे वह अतिरिक्त पैसा अभिभावकों को वापस (रिफंड) करना होगा।

https://x.com/AAPPunjab/status/2068961770249818130?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2068961770249818130%7Ctwgr%5Eddf6a69aa0bc052ff4a60efbeaed1ee93aba9846%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Ftv9punjabi.com%2Fpunjab-news%2Fpunjab-cabinet-meeting-decision-private-educational-institutional-can-incrase-only-5-percent-fee-industrial-policy-harpal-cheema-detail-in-punjabi-2210442

5% से ज्यादा फीस बढ़ानी है, तो अपनानी होगी यह सख्त प्रक्रिया

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने साफ किया कि अगर कोई संस्थान 5 फीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे बेहद सख्त प्रक्रिया से गुजरना होगा। फीस बढ़ोतरी के मामलों के निपटारे के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में डिवीजनल कमिश्नर, दो डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) और एक वित्तीय विशेषज्ञ (फाइनेंशियल एक्सपर्ट) शामिल होंगे।

यदि कोई स्कूल फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे सत्र शुरू होने या फीस लागू करने से कम से कम 6 महीने पहले कमेटी के पास आवेदन करना होगा। स्कूल को लिखित में ठोस कारण देना होगा कि वह फीस क्यों बढ़ाना चाहता है। उदाहरण के लिए, यदि स्कूल ने कोई नई सुविधा शुरू की है या नई बिल्डिंग बनाई है, तो उसका पूरा ब्यौरा देना होगा।

सिर्फ आवेदन करने से फीस बढ़ाने की इजाजत नहीं मिलेगी। कमेटी सबसे पहले उस स्कूल या संस्थान का पूरा वित्तीय ऑडिट करवाएगी। ऑडिट रिपोर्ट और जांच के आधार पर ही कमेटी तय करेगी कि फीस बढ़ाने की अनुमति दी जाए या नहीं।