चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर एक जनहित याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य सरकार की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग पर चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस यशवीर सिंह राठौर की खंडपीठ ने 21 जुलाई के लिए मामले पर सुनवाई तय की है।
याचिका में राज्यभर के सरकारी स्कूल भवनों का व्यापक स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट करवाने, असुरक्षित भवनों का तत्काल उपयोग बंद करने और मरम्मत, नवीनीकरण या पुनर्निर्माण के लिए समयबद्ध योजना लागू करने की मांग की गई है। वकील निखिल थम्मन की तरफ से दायर याचिका में कई जिलों के सरकारी स्कूल भवनों की भयावह स्थिति को उजागर किया गया।
याचिका में कहा गया कि राज्य के अनेक स्कूल दशकों पुराने, क्षतिग्रस्त और गंभीर रूप से जर्जर भवनों में संचालित हैं, जहां बच्चों स्टाफ की जान हर दिन जोखिम में डाली जा रही है। याचिका में पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, एसएएस नगर (मोहाली), रूपनगर, अमृतसर, मुक्तसर, गुरदासपुर, जालंधर और कपूरथला समेत कई जिलों के स्कूलों का विशेष उल्लेख किया गया।

याचिका के अनुसार इन स्कूल भवनों में दीवारों में गहरी दरारें, झड़ता प्लास्टर, कमजोर और टपकती छतें, उखड़ता लोहा तथा कई स्थानों पर गिरने की कगार पर पहुंच चुका निर्माण है।चिंता की बात यह है कि इन स्कूलों में अब भी नियमित कक्षाएं लग रही हैं। खराब मौसम, बारिश या तेज हवाओं के दौरान किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी है। कोर्ट को बताया कि संबंधित विभागों को पहले रिप्रेजेंटेंशन और लीगल नोटिस भेजे गए, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
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