​पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड में पिछले सात दिनों के भीतर चार मजदूरों की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर दिया है। ये सभी मजदूर आंध्र प्रदेश की एक मिनरल फैक्ट्री में काम करते थे, जहां पत्थरों से टैल्कम पाउडर बनाने के दौरान उड़ने वाली जहरीली धूल ने धीरे-धीरे उनके फेफड़ों को नष्ट कर दिया। इस त्रासदी ने न केवल परिवारों से उनके कमाऊ सदस्य छीने बल्कि इलाज के भारी खर्च ने उन्हें आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है।

​सुरक्षा के अभाव में मौत का सफर

​मृतकों में जियनगंज निवासी मो. मसद, मो. मुस्तफा, तारानगर के कुंदन कुमार और सर्रा बथना के अरविंद कुमार ऋषि शामिल हैं। मजदूरों का आरोप है कि फैक्ट्री में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। वहां उन्हें रोज 12-12 घंटे धूल भरे माहौल में काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। धीरे-धीरे उन्हें सांस लेने में गंभीर समस्या कमजोरी और फेफड़ों में संक्रमण होने लगा। जब उनकी स्थिति बिगड़ी, तो किसी तरह उन्हें वापस घर लाया गया।

​ऑक्सीजन के भरोसे जिंदगी, जमीन बेचकर इलाज

​वर्तमान में आठ अन्य मजदूर गंभीर रूप से बीमार हैं। मो. दानिश का पटना एम्स में तो श्रवण कुमार का जीएमसीएच में इलाज चल रहा है। वहीं, सितेश, विक्रम, रंजीत, राजिक और गांगुली की हालत इतनी नाजुक है कि वे घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे सांस ले रहे हैं। परिजनों का कहना है कि अपनों को बचाने के लिए उन्होंने अपनी जमा-पूंजी, खेत और मवेशी तक बेच दिए हैं, लेकिन बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही।

​लालच और शोषण का जाल

​मजदूरों के अनुसार करीब एक साल पहले इलाके के दर्जनों युवकों को बेहतर वेतन का लालच देकर आंध्र प्रदेश भेजा गया था। जब मजदूरों की तबीयत खराब हुई और उन्होंने घर लौटने की बात कही तो फैक्ट्री प्रबंधन ने उनके साथ मारपीट तक की। पीड़ित परिवारों ने स्थानीय ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि ठेकेदार ने इन आरोपों को साजिश बताते हुए खुद को निर्दोष करार दिया है।

​प्रशासन और जनप्रतिनिधि की सक्रियता

​मामले की गंभीरता को देखते हुए कसबा विधायक नितेश सिंह ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और हर संभव सरकारी मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी बीमार मजदूरों के बयान दर्ज कर रहे हैं और पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। यह घटना प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके शोषण पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।