शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी उसका संगठन है और इसे मजबूत करने के लिए वह लगातार जुटी हुई है। कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के जरिये जिला अध्यक्ष चुने फिर उनके कामकाज का आंकलन किया जा रहा है। जिसकी मॉनिटरिंग खुद राहुल गांधी कर रहे हैं। संगठन की समीक्षा करने के लिए राहुल गांधी फिर अगले महीने एमपी आ सकते हैं। एमपी कांग्रेस इसकी तैयारियों में जुटी हुई है।

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव भले अभी ढाई साल दूर हों, लेकिन कांग्रेस ने अभी से चुनावी जमीन मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी अब बूथ से लेकर संभाग स्तर तक अपने संगठन की ताकत और सक्रियता को परखने की रणनीति पर काम कर रही है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अगले महीने अपने संगठन सृजन अभियान का एक साल पूरा होने जा रहा है। पिछले साल 3 जून को भोपाल के रविंद्र भवन से राहुल गांधी ने इस अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद कांग्रेस ने अलग-अलग राज्यों के वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर जिला अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया शुरू की। लगभग 74 दिन बाद 16 अगस्त को प्रदेश के सभी 71 जिला अध्यक्षों के नाम घोषित किए गए थे।

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एमपी में कांग्रेस का संगठन

  • जिला अध्यक्ष : 71
  • जिला कार्यकारिणी : 71 – गठित 52
  • ब्लॉक अध्यक्ष : 1014 – नियुक्त 979
  • मंडलम अध्यक्ष : 5045 – नियुक्त 4800
  • पंचायत समिति : 23000 – गठित 21500
  • वार्ड समिति : 14500 – गठित 11300
  • बीएलए : 72400 – नियुक्त 67000

अब कांग्रेस उसी संगठन मॉडल की समीक्षा की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जून महीने में राहुल गांधी को उज्जैन और रीवा संभाग में संगठन समीक्षा के लिए बुलाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव जल्द ही एआईसीसी को भेजा जाएगा।

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राहुल सीधे कार्यकर्ताओं से करेंगे बात

समीक्षा के दौरान गांधी सिर्फ मंचीय बैठक नहीं करेंगे, बल्कि संगठन की जमीनी हकीकत भी परख सकते हैं। समीक्षा के दौरान वे किसी भी बूथ समिति, पंचायत समिति या वार्ड स्तर के कार्यकर्ता से सीधे फोन पर बात कर सकते हैं। साथ ही संगठन के काम और एक्टिविटी का फीडबैक भी लिया जाएगा। राहुल गांधी इससे पहले भी संगठन सृजन अभियान की शुरुआत, जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग, किसान आंदोलन और भागीरथ पूरे पानी जैसे मुद्दों को लेकर मध्यप्रदेश आ चुके हैं। कांग्रेस अब राहुल गांधी की सक्रियता के जरिए कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने की कोशिश में है।

वहीं बीजेपी ने कांग्रेस की इस कवायद पर तंज कसा है। कांग्रेस फिलहाल संगठन को बूथ स्तर तक एक्टिव करने की रणनीति पर काम कर रही है। क्योंकि पार्टी मानती है कि विधानसभा चुनाव की असली तैयारी चुनाव घोषणा से नहीं, बल्कि मजबूत संगठन से शुरू होती है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि राहुल गांधी का प्रस्तावित दौरा कांग्रेस संगठन में कितना नया उत्साह भर पाता है।

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