शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्यप्रदेश में सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस ने नई रणनीति बनाई है। पार्टी अब ग्रामीण इलाकों में संगठन मजबूत करने के लिए पंचायत चुनाव में पहली बार प्रत्याशियों को खुला समर्थन देगी। अब तक पंचायत चुनाव गैर-दलीय होते रहे हैं और दल सीधे दखल से बचते रहे हैं। लेकिन कांग्रेस इस बार 2028 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की ताकत परखना चाहती है।
कांग्रेस ने एमपी में वापसी के लिए नया दांव चला है। पार्टी ने फैसला किया है कि पंचायत चुनाव में सरपंच उम्मीदवारों को खुला समर्थन दिया जाएगा, प्रदेश में पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते हैं। इसलिए राजनीतिक दल अब तक प्रत्यक्ष दखल से बचते रहे हैं और नतीजों के बाद ही समर्थकों की जीत का दावा करते हैं, लेकिन कांग्रेस अब इस परंपरा को तोड़ रही है। कांग्रेस संगठन महामंत्री संजय कामले का कहना है कि ”पंचायत कमेटी का गठन करने का मुख्य उद्देश्य ही यही था जिससे पार्टी को ग्रामीण इलाकों में मजबूत किया जा सके। आने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों का भी हम समर्थन करेंगे, इससे ग्राम स्तर पर कार्यकर्ता सक्रिय होंगे।”
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कांग्रेस का दावा
कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में अब तक 21,478 पंचायत समितियां गठित हो चुकी हैं, प्रत्याशी चयन और समन्वय का काम इन्हीं समितियों को सौंपा जाएगा। पार्टी का मकसद ग्राम स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और संगठन को बूथ तक मजबूत करना है। इसके जरिए कांग्रेस 2028 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी जमीनी ताकत का आंकलन भी करेगी कांग्रेस के रणनीति पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं।
बीजेपी ने कही ये बात
बीजेपी मीडिया विभाग के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल का कहना है कि जहां प्रत्यक्ष प्रणाली से पार्टी का चुनाव होता है वहां तो कांग्रेस नजर आती नहीं है, जब टिकट वितरण की बात आती है तो गुटबाजी होती है, जूते चलते हैं, पोस्टरबाजी होती है। संवैधानिक रूप से जो चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होते हैं वहां आखिर ये लोग क्या कर पाएंगे।
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आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में करीब एक साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस की यह रणनीति 2028 के लिहाज से अहम मानी जा रही है, लेकिन सवाल ये है कि क्या गैर-दलीय चुनाव में खुला समर्थन कांग्रेस को फायदा देगा या गुटबाजी बढ़ाएगा। पंचायत चुनाव में खुले समर्थन का ये दांव कांग्रेस के लिए कितना कारगर होगा ये नतीजे बताएंगे।

