अनिल सक्सेना, रायसेन। मध्य प्रदेश में विकास के दावों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की पोल पहली ही तेज बारिश ने खोलकर रख दी है। भोपाल-सागर मार्ग पर आलमपुर के समीप MPRDC द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क का एक बड़ा हिस्सा पहली ही बारिश में धंस गया, जबकि निर्माणाधीन पुलिया पानी के तेज बहाव में बह गई। इस हादसे के बाद भोपाल-सागर हाईवे पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।

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गुणवत्ता से खिलवाड़ और जल निकासी की अनदेखी

स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने निर्माण एजेंसी तथा MPRDC पर भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और पुलिया निर्माण में ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता और मानक नियमों को ताक पर रखा गया।

वहीं जल निकासी की सही व्यवस्था न होने और क्षमता से कम गुणवत्ता वाली पुलिया बनाए जाने के कारण पानी के दबाव में पुलिया बह गई और सड़क का हिस्सा भरभराकर धंस गया।

भोपाल-सागर मार्ग ठप, राहगीरों की जान जोखिम में

भोपाल और सागर को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र की मुख्य लाइफलाइन माना जाता है। सड़क धंसने से न केवल हजारों यात्री, व्यापारी और आम नागरिक घंटों जाम में फंसे रहे, बल्कि बह चुके हिस्से के पास से गुजरने में हादसों का खतरा बना हुआ है।

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‘क्या पहली बारिश भी नहीं झेल सकतीं करोड़ों की सड़कें?’

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त सड़क और पुलिया की तत्काल मरम्मत कराई जाए। साथ ही करोड़ों रुपये डकारने वाले ठेकेदार और MPRDC के जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ की उच्च स्तरीय जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाए।

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