Rajasthan High Court Saturday Dispute: राजस्थान हाईकोर्ट में आज शनिवार को जबरदस्त गहमागहमी का माहौल रहा। एक तरफ जहां महीने के चौथे शनिवार को वर्किंग डे घोषित होने की वजह से 39 जज अदालतों में सुनवाई के लिए मुस्तैद थे, वहीं दूसरी तरफ वकीलों ने एक स्वर में काम का बहिष्कार कर दिया। हालात ऐसे बने कि जजों की कुर्सियां तो भरी रहीं, लेकिन पैरवी करने वाले वकील अपनी सीटों से नदारद दिखे। सबसे बड़ी बात यह है कि आज खुद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत भी जयपुर में मौजूद हैं, इसके बावजूद वकीलों ने अपना रुख नरम नहीं किया।

वकीलों में भारी आक्रोश, क्यों ठप रहा काम?
दरअसल, हाईकोर्ट प्रशासन ने पिछले साल दिसंबर में एक बड़ा फैसला लिया था कि पेंडिंग केसों को निपटाने के लिए महीने के पहले और चौथे शनिवार को भी अदालतें लगेंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे साल भर में 24 दिन का एक्स्ट्रा समय मिलेगा, जिससे केस जल्दी निपटेंगे। लेकिन वकील इस फैसले के खिलाफ हैं। जयपुर के बड़े चौराहों और हाईकोर्ट परिसर के बाहर वकीलों की चर्चा यही है कि उन पर काम का बोझ जबरदस्ती लादा जा रहा है।
39 जजों की मौजूदगी और लार्जर बेंच का दांव
आज का दिन इसलिए भी खास था क्योंकि जयपुर बेंच में एक साथ 39 न्यायाधीश सुनवाई के लिए मौजूद रहे। इतना ही नहीं, गंभीर मामलों के निपटारे के लिए 12 जजों की चार बड़ी (लार्जर) बेंच भी बनाई गई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने वकीलों की अनुपस्थिति पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट रूम के गलियारों में सन्नाटा देख प्रशासन भी अब अगली रणनीति बनाने में जुट गया है।
आखिर क्यों शुरू हुआ यह नया नियम?
बता दें कि 12 दिसंबर 2025 को हुई फुल कोर्ट मीटिंग में यह तय हुआ था कि राजस्थान हाईकोर्ट में अब छुट्टियों में कटौती की जाएगी। अदालतों पर केसों का अंबार लगा है, जिसे देखते हुए वर्किंग डे बढ़ाने का फैसला हुआ। महीने के दो शनिवार (पहला और चौथा) को कोर्ट खुला रखने का आदेश दिया गया। मगर वकीलों का तर्क है कि इससे उन्हें रिसर्च और फाइल तैयार करने का समय नहीं मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि लंबित मामलों को खत्म करने के लिए यह करो या मरो वाली स्थिति है। आज जजों की भारी संख्या के बावजूद वकीलों के न आने से हजारों मुकदमों की तारीख आगे बढ़ गई।
फिलहाल, राजधानी जयपुर में न्यायिक हलकों में यह मुद्दा गर्म है। अब देखना यह होगा कि क्या हाईकोर्ट प्रशासन वकीलों की जिद के आगे झुकता है या फिर शनिवार को काम करने का यह नियम आगे भी जारी रहता है।
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