JLN Hospital Ajmer: संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने एक बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। किशनगढ़ में ट्रक की चपेट में आने से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर निवासी युवक सूफियान का निचला जबड़ा टूटकर शरीर से अलग हो गया था। वह खून और मिट्टी से सने जबड़े को लेकर एंबुलेंस से अजमेर पहुंचा। जांच के बाद डॉक्टरों ने उसी जबड़े को वापस जोड़ने का फैसला किया। करीब 5 से 6 घंटे चली सर्जरी के बाद जबड़े को सफलतापूर्वक फिक्स कर दिया गया।

जन्माष्टमी की रात अस्पताल पहुंचा था युवक

यह हादसा कृष्ण जन्माष्टमी के दिन हुआ। सूफियान किशनगढ़ में फेरी लगाकर कपड़े बेचता था। इसी दौरान एक ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि उसका जबड़ा टूटकर शरीर से अलग हो गया। हालांकि, जबड़े के अलावा उसके शरीर पर कोई दूसरी गंभीर चोट नहीं थी। घायल युवक जबड़े को साथ लेकर एंबुलेंस से जेएलएन अस्पताल पहुंचा। यहां प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. नेपो विद्यार्थी और उनकी टीम ने एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों के साथ मरीज की बारीकी से जांच की। इसके बाद तय किया गया कि जबड़े को दोबारा जोड़ा जा सकता है।

सबसे बड़ी चुनौती थी नसों और मांसपेशियों को बचाना

डॉ. नेपो विद्यार्थी के मुताबिक यह सर्जरी कई स्तर पर चुनौतीपूर्ण थी। जबड़े की नसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इसके कारण जबड़े की हड्डी तक रक्त नहीं पहुंच रहा था। सर्जरी के दौरान हड्डी को सही स्थिति में फिक्स करने के साथ रक्त की आपूर्ति को ठीक करना भी जरूरी था। मांसपेशियों को भी सही तरीके से सेट किया गया, ताकि निचला जबड़ा ऊपर-नीचे हो सके। जीभ को भी उसकी सही जगह पर लगाया गया। इसके अलावा दांतों का सही एलाइनमेंट करना भी चुनौती थी। डॉक्टरों के मुताबिक जबड़े की हड्डियों को जोड़ना एक हिस्सा था, लेकिन दांतों को सही तरीके से मिलाना अलग और महत्वपूर्ण काम था।

डॉक्टरों ने किताबों और इंटरनेट पर भी खोजा तरीका

डॉ. विद्यार्थी ने बताया कि उन्होंने इस तरह की सर्जरी के तरीके को समझने के लिए कई किताबें देखीं और इंटरनेट पर भी काफी जानकारी खोजी। लेकिन उन्हें इस तरह की सर्जरी का उदाहरण कहीं नहीं मिला। इसके बाद अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने ऑपरेशन किया और जबड़े को वापस फिक्स किया। चिकित्सकों का कहना है कि शरीर से पूरी तरह अलग हुए जबड़े को वापस जोड़ने की इस तरह की सर्जरी बेहद दुर्लभ है। अस्पताल में भी यह पहला ऐसा मामला बताया गया है।

पहले सांस की नली डाली, फिर शुरू हुआ ऑपरेशन

अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने बताया कि जबड़े के पूरी तरह बाहर निकल जाने के कारण सबसे पहले मरीज की सांस की नली सुरक्षित करना जरूरी था। इसके लिए ईएनटी विभाग की मदद से गले में श्वास की नली डाली गई। इसके बाद जटिल सर्जरी शुरू की गई। ऑपरेशन में करीब 5 से 6 घंटे लगे। इसके लिए जरूरी उपकरण और सामग्री अस्पताल की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराई गई।

आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज

युवक का इलाज प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जा रहा है। अस्पताल अधीक्षक के मुताबिक गंभीर अवस्था में भारत का कोई भी नागरिक यहां आता है तो योजना के तहत उसका इलाज निशुल्क किया जाएगा। डॉ. खरे ने बताया कि निजी बड़े अस्पताल में इसी तरह की सर्जरी का खर्च करीब 15 से 20 लाख रुपये तक आ सकता था। उन्होंने कहा कि अब संभाग स्तर के इस अस्पताल में भी ऐसे मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

डॉक्टर बोले- ऐसा मामला पहले कभी नहीं देखा

डॉ. खरे ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी विभाग इससे पहले भी तीन दुर्लभ सर्जरी कर चुका है। लेकिन उन्होंने अपने जीवन में ऐसा मामला पहले नहीं देखा, जिसमें पूरा जबड़ा ही शरीर से अलग हो गया हो। उन्होंने बताया कि कैंसर के मामलों में जबड़ा निकाला जाता है, लेकिन उसे वापस नहीं लगाया जाता। इस मामले में जबड़े को उसी मरीज के शरीर में वापस जोड़ा गया है। सर्जरी के दौरान जबड़े की हड्डियों को जीवित रखने और मांसपेशियों को सक्रिय रखने की पूरी व्यवस्था की गई।

तीन हफ्ते बाद फिर होगी जांच

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति ठीक बताई जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक जबड़े का एलाइनमेंट सही तरीके से किया गया है और इसके परिणाम भी अच्छे रहने की उम्मीद है। मरीज की करीब तीन सप्ताह बाद दोबारा जांच की जाएगी। डॉ. विद्यार्थी ने बताया कि मरीज जन्माष्टमी की रात अस्पताल पहुंचा था और उसी रात उसकी सर्जरी कर दी गई। उनके मुताबिक पहले जरूरी उपकरण और सामग्री उपलब्ध कराने में देरी हो जाती थी, लेकिन अब जरूरत के समय तत्काल संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं।

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