Rajasthan News: आज अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस है, लेकिन राजस्थान की सियासत में इस मौके पर मजदूरों के हक को लेकर घमासान शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के लाखों श्रमिकों की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए सीधे सरकार को घेरे में ले लिया है।

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर दो टूक कहा है कि महंगाई के इस दौर में राजस्थान के अकुशल श्रमिकों को मिलने वाली 7,410 रुपये की मजदूरी ऊंट के मुंह में जीरा है। सूत्रों की मानें तो गहलोत के इस पत्र के बाद अब सचिवालय से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल तेज हो गई है।

राहुल गांधी की न्याय योजना पर टिकी उम्मीदें

मजदूरों को बधाई देते हुए अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी न्याय (NYAY) योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केवल सम्मान देने से पेट नहीं भरता, असली बदलाव तब आएगा जब श्रमिकों की जेब में पैसा पहुंचेगा। गहलोत ने अपनी सरकार की शहरी रोजगार गारंटी योजना की याद दिलाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि राहुल गांधी की न्यूनतम आय योजना को अब धरातल पर उतारने का समय आ गया है।

केरल और दिल्ली से तुलना, राजस्थान पीछे क्यों?

गहलोत ने अपने पत्र में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने बताया कि जहां केरल और दिल्ली जैसे राज्यों में मजदूरी में 80 से 110 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं राजस्थान इस मामले में पिछड़ता जा रहा है। जयपुर के पांचबत्ती और सांगानेर जैसे इलाकों में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान मजदूरी दर से परिवार पालना नामुमकिन हो गया है।

गहलोत की सरकार को ये 4 बड़ी सलाह

  • न्यूनतम मजदूरी को तुरंत बढ़ाकर 12,000 से 15,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
  • महंगाई भत्ते (VDA) को हर 6 महीने में अपने आप लागू करने का सिस्टम बने।
  • खेती, कंस्ट्रक्शन और घरेलू काम के लिए अलग-अलग मजदूरी दरें तय हों।
  • मजदूरी तय करते समय अब बच्चों की पढ़ाई, सेहत और बस-किराये के खर्च को भी जोड़ा जाए।

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