SI Paper Leak Case in Rajasthan High Court: एसआई भर्ती-2021 पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपने तर्क रखे। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि एसओजी की रिपोर्ट कोई काल्पनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि तीन चार्जशीट पर आधारित तथ्यात्मक रिपोर्ट है। दलील दी गई कि 13 से 15 सितंबर के बीच हुई एसआई भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर लीक हुए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कैलाशचंद्र शर्मा की ओर से कहा गया कि यह प्रदेश में पहली बार है जब राज्य सरकार अपनी ही जांच एजेंसी के निष्कर्षों के खिलाफ अदालत में बहस कर रही है। उन्होंने बताया कि पेपर लीक में परीक्षा केंद्रों के कर्मचारी सहित अन्य लोग शामिल थे और इस प्रकरण में आरपीएससी के कुछ सदस्यों की भूमिका भी सामने आई है। मामले की सुनवाई सोमवार, 19 जनवरी से जारी रहेगी।
परीक्षा स्थगित न करने पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट हरेंद्र नील ने कोर्ट को बताया कि 13 सितंबर को पहला पेपर चाचा–भतीजा ब्लूटूथ गैजेट गिरोह के तुलछाराम कालेर और सौरभ कालेर ने बीकानेर के रामसहाय सीनियर सेकेंडरी स्कूल से लीक किया था। उसी दिन पाली और बीकानेर में मामले दर्ज हुए, इसके बावजूद परीक्षा को स्थगित नहीं किया गया।
वीडियोग्राफी न होने पर भी आपत्ति
14 और 15 सितंबर को जयपुर से कई गिरोहों तक पेपर पहुंचाने वाले यूनिक भांभू और जगदीश विश्नोई विदेश फरार हो गए, जिन पर एक-एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया। इस दौरान कुल 11 एफआईआर दर्ज हुईं। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि एक परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी के पास से मोबाइल में पेपर की कॉपी भी बरामद हुई थी। इसके बावजूद आरपीएससी की ओर से परीक्षा केंद्रों पर वीडियोग्राफी नहीं कराई गई, जिससे लीक के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हुआ और पूरे मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाया गया।
तीन महीने में पूरी करनी है सुनवाई
गौरतलब है कि एसआई भर्ती पेपर लीक मामले में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त को भर्ती रद्द करने का आदेश दिया था। चयनित अभ्यर्थियों ने इस फैसले को खंडपीठ में चुनौती दी, जिस पर रोक लगा दी गई। बाद में अन्य अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को बहाल करते हुए खंडपीठ को तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने भी दायर की याचिका
एकलपीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने भी याचिका दायर की है। अब सभी याचिकाओं पर राजस्थान हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई चल रही है। सरकार का पक्ष है कि पूरी भर्ती रद्द करना उचित नहीं है, जांच एजेंसी छंटनी के जरिए दोषियों को अलग कर सकती है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि पेपर लीक पूरे प्रदेश में नहीं हुई, इसलिए भर्ती रद्द नहीं की जानी चाहिए।
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