Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए समाज की एक कुप्रथा पर बहुत बड़ी बात कह दी है। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा है कि आटा-साटा प्रथा के नाम पर बेटियों को वैवाहिक सौदेबाजी का जरिया नहीं बनाया जा सकता। कोई भी लड़की किसी दूसरे लड़के की शादी कराने की गारंटी नहीं हो सकती। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की बेंच ने बीकानेर की एक पीड़ित महिला की अपील को स्वीकार करते हुए उसे तलाक की मंजूरी दे दी है।

बीकानेर फैमिली कोर्ट का फैसला पलटा

दरअसल, बीकानेर की एक महिला ने दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मोटरसाइकिल-सोने की चेन की मांग से तंग आकर फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई थी। पिछले साल 24 सितंबर 2025 को बीकानेर फैमिली कोर्ट ने इस तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने अब फैमिली कोर्ट का वह पुराना आदेश रद्द कर दिया है।

पति की दलील कोर्ट में नहीं टिकी

मामले में पति का कहना था कि उसकी शादी आटा-साटा प्रथा के तहत हुई थी। यानी उसकी बहन की शादी महिला के भाई से हुई थी। पति ने दावा किया कि विवाद तब शुरू हुआ जब उसकी बहन ने बालिग होने के बाद मुकलावा (गौना) करने से मना कर दिया। पति ने पत्नी के साथ मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों को झूठा बताया था। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया।

इंसानों की खरीद-फरोख्त है यह प्रथा

हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिसे समाज की परंपरा बताया जा रहा है, वह असल में इंसानों का लेन-देन है। बचपन से बने सामाजिक दबाव के कारण बालिग होने पर जो सहमति दिखती है, उसे अपनी मर्जी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था बच्चों के अधिकारों की गलती है, जिसे कानून और समाज दोनों में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए।

महिला पुलिस अधिकारी सीमा जाखड़ को बड़ी राहत

हाईकोर्ट से एक और बड़ी खबर आई है। अदालत ने एनडीपीएस मामले में फंसी बर्खास्त थानाधिकारी सीमा जाखड़ की जमानत रद्द करने से साफ मना कर दिया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने राजस्थान सरकार की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें सीमा जाखड़ की जमानत खत्म करने की मांग की गई थी।

सरकार को कोर्ट की नसीहत

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आरोपों की गंभीरता देखकर किसी की जमानत रद्द नहीं की जा सकती। इसके लिए पुख्ता कारण होने चाहिए, जैसे गवाहों को डराना या सबूत मिटाना। कोर्ट ने सरकार को नसीहत भी दी कि ऐसी याचिका लगाने से पहले सही कानूनी सलाह लेनी चाहिए थी।

यह पूरा मामला सिरोही जिले के बरलूट थाने से जुड़ा है। आरोप था कि 14 नवंबर 2021 को डोडा पोस्त तस्करी के मामले में तत्कालीन थानाधिकारी सीमा जाखड़ ने 10 लाख रुपए की रिश्वत लेकर आरोपियों को भगाने में मदद की थी। बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि सीमा ने जमानत की किसी शर्त को नहीं तोड़ा है।

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