Rajasthan News: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली शनिवार को उदयपुर दौरे पर पहुंचे। यहां एक निजी शादी समारोह में उन्होंने मीडिया से बातचीत में केंद्र सरकार, उसकी विदेश नीति और देश में बढ़ती महंगाई को लेकर करारा हमला बोला। जूली ने साफ कहा कि देश की जनता अब सिर्फ लंबे-चौड़े भाषणों और दिखावे से मानने वाली नहीं है। लोग अब सरकार से ठोस काम और जिम्मेदारी चाहते हैं।

पाकिस्तान पर दोहरी भाषा नहीं चलेगी

आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी ने पिछले दिनों बयान दिया था कि पाकिस्तान से बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहिए। इस बात पर जूली जमकर भड़के। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और हमारे जवानों की इज्जत के मामले में ऐसी दोहरी बातें बिल्कुल नहीं की जा सकतीं। जब भी सीमा पर पाकिस्तान ने कोई गंदी हरकत की, हमारी सेना ने उसे हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया है। ऐसे में अचानक बातचीत की वकालत करना देश के शहीद जवानों की शहादत और सेना के हौसले का अपमान लगता है।

विदेश नीति पर उठाए गंभीर सवाल

जूली ने भारत की मौजूदा विदेश नीति को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के मंचों पर देश की साख बहुत मजबूत होने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन असलियत कुछ और ही है। भारत को कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज होना पड़ रहा है। सरकार को अपनी विदेश नीति में साफ-सफाई और मजबूती लानी होगी।

एक समय नारा दिया गया था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते, फिर आज अचानक पाकिस्तान से बात करने की क्या मजबूरी आ गई? आरएसएस को इस बात का जवाब देश को देना चाहिए।

नेताओं के दिखावे पर तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों और जनता को सादगी बरतने की सलाह पर भी जूली ने खूब तंज कसे। उन्होंने कहा कि हमारे देश के लोग त्याग और अनुशासन बहुत अच्छे से समझते हैं। मुश्किल वक्त में जनता ने हमेशा सरकार की हर बात का साथ दिया है। लेकिन अब जनता यह देखना चाहती है कि बड़े नेता खुद अपने जीवन में कितनी सादगी रखते हैं। मंत्रियों के ऑटो या ट्रेन में सफर करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सब सिर्फ कैमरों के सामने चमकने के लिए किया जाता है। असल में सरकार के पास महंगाई रोकने का कोई प्लान ही नहीं है।

महंगाई से रसोई का बजट बिगड़ा

ईंधन के बढ़ते दामों को लेकर जूली ने सरकार को घेरा। उन्होंने समझाया कि जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो मालभाड़ा और सामान बनाने का खर्च अपने आप बढ़ जाता है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और घर की रसोई पर पड़ता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बहुत सस्ता था, तब तेल कंपनियों ने जमकर मलाई खाई। अब ग्लोबल मार्केट में थोड़ी सी हलचल होते ही पूरा बोझ जनता के सिर पर मढ़ दिया गया है।

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