Rajasthan News: करीब 18 साल पहले प्रसव के दौरान नवजात की मौत मामले में हाई कोर्ट ने निचली कोर्ट की ओर से सेवायतन अस्पताल की डॉ. विनय सुरैन के खिलाफ निचली कोर्ट के लिए प्रसंज्ञान आदेश को सही करार दिया है।
हाई कोर्ट ने कहा कि निचली कोर्ट ने मामले में पेश एफआर को अस्वीकार कर इसे अग्रिम अनुसंधान के लिए भेजने के दौरान किसी तरह की गलती नहीं की है। ऐसे में इस मामले में कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना निचली कोर्ट मामले की सुनवाई करें।

जस्टिस आनंद शर्मा ने यह आदेश डॉ. विनय सुरैन की आपराधिक याचिका खारिज करते हुए दिया। महिला डॉक्टर ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि मामले में सोडाला थाना पुलिस ने दिसंबर 2007 में एफआर पेश कर दी थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने इसके खिलाफ प्रोटेस्ट पिटिशन नहीं लगाई। निचली कोर्ट ने जांच अधिकारी के प्रार्थना पत्र पर मामले को अग्रिम अनुसंधान के लिए भेज दिया। बाद में इसमें सीआईडी सीबी ने प्रार्थिया के खिलाफ चालान पेश कर दिया और निचली कोर्ट ने प्रसंज्ञान ले लिया। प्रसंज्ञान आदेश को रद्द किया जाए।
इसके विरोध में शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अंशुमन सक्सेना ने अदालत को बताया कि परिवादी की पुत्रवधू सोनल को डिलीवरी के लिए सेवायतन अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां डिलीवरी के दौरान नवजात की मौत हो गई। प्रार्थिया खुद को स्त्री रोग विशेषज्ञ होने का दावा करती है, लेकिन उसके पास इसकी विशेषज्ञता नहीं है। अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए भी योग्य स्टाफ नहीं थां। महिला डॉक्टर की लापरवाही के चलते नवजात की मौत हुई। निचली कोर्ट ने प्रसंज्ञान लेकर गलती नहीं की है, याचिका खारिज करें।
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