Rajasthan Politics: राजस्थान में 2 दिसंबर को मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं. बता दें इससे पहले पहले 30 नवंबर की चर्चा थी, लेकिन पार्टी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के बेटे के विवाह कार्यक्रम की वजह से यह बदलाव आगे बढ़ा दिया गया.

सूत्रों के अनुसार करीब दस मंत्रियों को बाहर किया जा सकता है. उप मुख्यमंत्रियों और कुछ बड़े विभागों में भी बदलाव की तैयारी है. खाली पदों पर नए और सक्षम चेहरों को लाने की बात चल रही है. श्रीचंद कृपलानी, गुरवीर सिंह बराड़, दीप्ति माहेश्वरी, जसवंत यादव और पुष्पेंद्र सिंह बाली के नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं. साथ ही यह भी संकेत मिल रहे हैं कि आलाकमान ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पूरी छूट दी है.
प्रदेश में इस समय लगातार प्रशासनिक फेरबदल हो रहे हैं. अंता उपचुनाव में हार और सरकार के दो साल पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल में बदलाव लगभग तय माना जा रहा है. अभी कैबिनेट में 24 मंत्री हैं, जबकि सीमा 30 की है. छह पद खाली होने से नए चेहरों के आने की संभावना और बढ़ जाती है.
पार्टी के अंदर गुटीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व इस बदलाव की मुख्य वजह बताई जा रही है. शेखावाटी और मेवाड़ से नए प्रतिनिधियों को शामिल करने की चर्चा तेज है. गुर्जर और मेघवाल समुदायों को अधिक जगह देने की मांग भी सामने है.
वसुंधरा राजे के गुट को साधने की कोशिशें भी जारी हैं. संकेत यह हैं कि कैबिनेट विस्तार में इस गुट का संतुलन बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा. संगठन के भीतर मान्यता है कि शेखावाटी, पूर्वी राजस्थान और आदिवासी इलाकों से नए चेहरों को शामिल करने से राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन मजबूत होगा.
सूत्र यह भी कह रहे हैं कि यह फेरबदल खाली पद भरने तक सीमित नहीं रहेगा. कुछ कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों को हटाया जा सकता है. मौजूदा मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं.
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