संजय पाटीदार, भोपाल। एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सर्वसुविधायुक्त ‘सांदीपनि विद्यालय’ जैसी योजनाएं संचालित करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ताजा मामला राजगढ़ जिले के डोभरा गांव से सामने आया है, जहां एक सरकारी स्कूल की कथित बदहाली का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे अपनी समस्याएं बताते नजर आ रहे हैं और परिसर में तबेला भी दिखाई दे रहा है।
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टॉयलेट, सफाई और मिड-डे मील पर बच्चों के गंभीर आरोप
वायरल वीडियो में स्कूल के बच्चों ने परिसर में शौचालय की सुविधा न होने, चारों तरफ फैली गंदगी और घटिया गुणवत्ता वाले मध्यान्ह भोजन यानि मिड-डे मील को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। तबेले जैसी जगह में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चों का यह वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की पोल खुलती नजर आ रही है।
BEO का सफाई: “वीडियो वाला भवन स्कूल का हिस्सा नहीं, नोटिस जारी”
मामला तूल पकड़ने पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) दिलीप शर्मा का बयान सामने आया है। बीईओ ने सफाई देते हुए कहा कि स्कूल के पास जो मुख्य भवन है, उसी में वर्तमान में कक्षाएं सुरक्षित रूप से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखाया गया जर्जर भवन या तबेला स्कूल संचालन में इस्तेमाल नहीं होता है। वहीं मध्यान्ह भोजन में लापरवाही को लेकर बीईओ ने बताया कि स्व सहायता समूह संचालक और स्कूल के प्रधानाचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है।
मामले पर छिड़ी सियासत: कांग्रेस बोली- ‘शिक्षा व्यवस्था पर लगा ब्रेक’
राजगढ़ के इस वीडियो को लेकर अब मध्य प्रदेश में राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में शिक्षा पर ब्रेक लगाया जा रहा है। राजगढ़ में तबेले में स्कूल चलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदेश में शिक्षा माफिया को सरकार का खुला संरक्षण मिल रहा है।
बीजेपी का पलटवार: “कांग्रेस के शासन में चौपट हुई थी व्यवस्था”
कांग्रेस के आरोपों का करारा जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में प्रदेश की स्कूल व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी थी। कांग्रेस सरकार ने स्कूल भवनों के रखरखाव तक के लिए फंड जारी नहीं किया और उनके नेता स्कूलों के नाम पर केवल भ्रष्टाचार करते थे, जबकि भाजपा सरकार लगातार सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने का काम कर रही है।
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बयानों से आगे बढ़कर जमीनी सुधार की जरूरत
यह पूरा मामला सिर्फ एक स्कूल भवन का नहीं बल्कि उन मासूम बच्चों का है जो सम्मानजनक माहौल में बेहतर शिक्षा पाने के हकदार हैं। वायरल वीडियो ने सरकारी दावों की पोल जरूर खोली है। अब यह शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि वह कागजी दावों और बयानों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर सुविधाओं में सुधार करे।
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