रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को जीवन में बड़े लक्ष्य रखने की सीख दी. उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार, संवेदनशीलता और व्यावहारिक कौशल के विकास पर जोर दिया.
सतीश सिंह, लखनऊ. देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का ज्ञान और चिंतन इतना व्यापक एवं समृद्ध रहा है कि संत-महात्माओं ने सदियों पूर्व जिन विचारों और जीवन-मूल्यों की बात कही थी, आज पूरा विश्व उन्हें अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. आज भारत जो बोलता है, दुनिया उसे कान खोलकर सुनती है.
शनिवार को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जीवन में बड़े लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मन को बड़ा रखना आवश्यक है. बड़े मन में व्यापक सोच और सकारात्मकता होती है, जिससे व्यक्ति परमानंद एवं वास्तविक सुख की अनुभूति प्राप्त कर सकता है.

उन्होंने मन को एक वृत्त (सर्किल) की तरह बताते हुए कहा कि जैसे-जैसे उसका दायरा बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे सुख और संतुष्टि का विस्तार होता जाता है.
वास्तविक शिक्षा का अर्थ
रक्षामंत्री ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय का नाम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जैसे महान विचारक एवं समाज सुधारक से जुड़ा है, इसलिए यहां के विद्यार्थियों से अपेक्षाएं भी अधिक हैं. उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा वही है, जो व्यक्ति के Head, Heart और Hand अर्थात मस्तिष्क, हृदय और हाथ तीनों का विकास करे.

Head से तार्किक एवं विवेकपूर्ण क्षमता का विकास हो, Heart में मानवीय संवेदनाएं हों और Hand के माध्यम से व्यक्ति अपने ज्ञान को व्यावहारिक कौशल में परिवर्तित कर सके. उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कार के साथ संवेदनशीलता का होना आवश्यक है.
डिग्री सिर्फ एंट्री प्वाइंट
डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के जीवन एवं विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने न केवल यह बताया कि समाज को बदलने का मार्ग क्या है, बल्कि यह भी बताया कि परिवर्तन की शुरुआत कहां से की जा सकती है. विद्यार्थियों को उनके “Educate, Agitate and Organize” के मंत्र से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए.

उन्होंने कहा कि संभावनाओं की दुनिया में डिग्री केवल एक एंट्री प्वाइंट है, जो यह बताती है कि हमारी यात्रा कहां से शुरू हुई है, यह नहीं कि उसका अंत कहां होगा.
अंकों की दौड़ से अलग हों
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के साथ-साथ हमें अंकों की दौड़ से स्वयं को अलग करना होगा. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से अर्जित ज्ञान का उद्देश्य केवल उपाधि प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य करना होना चाहिए, जो समाज के हित में हो और देश को सर्वोच्च स्थान पर पहुंचाने में योगदान दे.
विद्यार्थियों को अपने ज्ञान, कौशल एवं प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करते हुए भारत की वैश्विक पटल पर एक सशक्त पहचान स्थापित करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए. इस दौरान विवि के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने विवि की प्रगति रिपोर्ट रखी.
समारोह के दौरान विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 22 विद्यार्थियों को मंच से सम्मानित किया गया. इस मौके पर मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल व डिग्री देकर सम्मानित किया गया.


