राजधानी दिल्ली में बढ़ते जल संकट के बीच मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने नहर के जरिए दिल्ली को न्यूनतम 1000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन दिया है, जिससे राजधानीवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में इस समय पानी की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। शहर को जरूरत से करीब 100 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) कम पानी मिल रहा है। हालात तब और गंभीर हो गए जब वजीराबाद बैराज के पास जलाशय का जलस्तर सामान्य 674.15 फीट से घटकर करीब 668 फीट पर पहुंच गया। इसका सीधा असर वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों की उत्पादन क्षमता पर पड़ा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल मंत्री Parvesh Verma और दिल्ली जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए।

980 से ज्यादा टैंकर, रोजाना 6 हजार से अधिक फेरे

सरकार के अनुसार, पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों में फिलहाल 980 से अधिक टैंकर तैनात किए गए हैं, जो प्रतिदिन 6 हजार से ज्यादा फेरे लगाकर लोगों तक पानी पहुंचा रहे हैं। घनी आबादी और संकरी गलियों वाले क्षेत्रों के लिए छोटे टैंकरों की भी व्यवस्था की गई है। जरूरत पड़ने पर टैंकरों की संख्या और बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

अतिरिक्त बोरवेल से मिलेगी 10.5 एमजीडी राहत

जल आपूर्ति बढ़ाने के लिए यमुना खादर क्षेत्र में नए बोरवेल स्थापित किए गए हैं, जिनसे प्रतिदिन 10.5 एमजीडी अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही अधिकारियों को जल रिसाव की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली जल बोर्ड की हेल्पलाइन पर पिछले एक सप्ताह के दौरान पानी से जुड़ी 11,055 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 8,500 से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है, जबकि बाकी शिकायतों पर तेजी से काम जारी है।

स्थायी समाधान की दिशा में भी तेज कदम

सरकार केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रहना चाहती। जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए कई अहम परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। इनमें हरियाणा से पाइपलाइन के जरिए पानी लाने की योजना भी शामिल है, जिसकी व्यवहार्यता का अध्ययन Indian Institute of Technology Roorkee कर रहा है।

इसके अलावा यमुना में ड्रेजिंग और गाद हटाने का कार्य, नए जल शोधन संयंत्रों की स्थापना, अतिरिक्त बोरवेल, तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उपचारित जल को गैर-पेय कार्यों में उपयोग करने के लिए ड्यूल पाइपलाइन सिस्टम लागू करने की दिशा में भी काम जारी है।

गर्मी में 1250 एमजीडी पानी की जरूरत

जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि भीषण गर्मी के दौरान दिल्ली को करीब 1250 एमजीडी पानी की आवश्यकता होती है। वजीराबाद जलाशय का स्तर गिरने से दो प्रमुख जल शोधन संयंत्रों को 80 से 100 एमजीडी कम पानी मिल रहा है। इसके बावजूद कैरियर लाइन कैनाल और यमुना किनारे स्थापित बोरवेलों से अतिरिक्त पानी पहुंचाकर दिल्ली जल बोर्ड रोजाना लगभग 900 एमजीडी पानी की आपूर्ति बनाए रखने में सफल रहा है।

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