दिल्ली सरकार  (Delhi Government) ने राजधानी के बुनियादी ढांचे को और मजबूत बनाने तथा यातायात सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 15 साल से अधिक पुराने 44 फ्लाईओवरों के व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को शहरी विकास और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था की दिशा में अहम माना जा रहा है। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, जिन फ्लाईओवर्स का ऑडिट किया जाएगा, उनमें से कई का निर्माण वर्ष 1982 से 2010 के बीच हुआ था। ये फ्लाईओवर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बावजूद राजधानी के प्रमुख ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के रूप में काम कर रहे हैं। समय के साथ बढ़ते उपयोग और संरचनाओं के पुराने होने को देखते हुए इनकी तकनीकी जांच को जरूरी बताया गया है। ऑडिट के दौरान फ्लाईओवर्स की संरचनात्मक मजबूती, भार वहन क्षमता, सतह की स्थिति और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच की जाएगी। इसके आधार पर मरम्मत, सुदृढ़ीकरण या पुनर्निर्माण जैसी आवश्यक कार्रवाइयों की सिफारिश की जाएगी।

PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इस पहल पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राजधानी की अहम सार्वजनिक संपत्तियों को संरक्षित रखना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय के साथ पुराने हो चुके फ्लाईओवरों की वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी हो जाती है ताकि किसी भी तरह की संरचनात्मक कमजोरी या जोखिम को पहले ही पहचाना जा सके। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग (PWD) को आगामी वर्षों में इन फ्लाईओवरों के विस्तृत ऑडिट के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए लगभग 11 करोड़ रुपये के प्रशासनिक व्यय और खर्च को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

PWD मंत्री ने बताया कि ऑडिट कार्यक्रम को अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा, ताकि हर संरचना की विस्तृत और तकनीकी जांच ठीक से हो सके। इसमें कुछ ऐसे फ्लाईओवर और इंटरचेंज भी शामिल हैं जो रोजाना भारी यातायात संभालते हैं। ऑडिट सूची में शामिल प्रमुख फ्लाईओवर और ग्रेड सेपरेटर इस प्रकार हैं:

I.P. पर रिंग रोड इंटरसेक्शन

एस्टेट फ्लाईओवर (1982)

RUB नागिया पार्क–शक्ति नगर (1990)

नारायणा फ्लाईओवर (2010) Naraina Flyover

मंगोलपुरी फ्लाईओवर (2008)

लाजपत नगर–श्रीनिवासपुरी फ्लाईओवर (2006)

सराय काले खां फ्लाईओवर (2003) Sarai Kale Khan Flyover

सफदरजंग (AIIMS) फ्लाईओवर (2003) AIIMS Flyover

DND फ्लाईओवर (2008) DND Flyway

अफ्रीका एवेन्यू–अरुणा आसफ अली मार्ग फ्लाईओवर (2009)

आजादपुर ग्रेड सेपरेटर (2010) Azadpur Grade Separator

गाजीपुर फ्लाईओवर (2010) Ghazipur Flyover

मंत्री प्रवेश वर्मा ने जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली के 44 फ्लाईओवरों का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा किसी भी संकट का इंतजार नहीं कर सकती और जैसे-जैसे दिल्ली का विस्तार हो रहा है, इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती और विश्वसनीयता और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है। कई फ्लाईओवर 15 साल से अधिक पुराने हो चुके हैं और रोजाना लाखों यात्री इनका उपयोग करते हैं। इस ऑडिट का उद्देश्य फ्लाईओवरों की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना, संभावित खामियों की शुरुआती चरण में पहचान करना और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते मरम्मत या सुधारात्मक कदम उठाना है।

मंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया केवल एक निरीक्षण नहीं है, बल्कि दिल्ली के नागरिकों की सुरक्षा, भरोसे और सुविधा में एक निवेश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार न सिर्फ नए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि मौजूदा सार्वजनिक संपत्तियां मजबूत, सुरक्षित और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी बनी रहें।

मंजूर किए गए प्रस्ताव के अनुसार, चयनित कंसल्टेंट इन फ्लाईओवरों का विस्तृत संरचनात्मक मूल्यांकन करेगा। इससे अधिकारियों को फ्लाईओवरों की वर्तमान स्थिति का आकलन करने, क्षरण या खराबी के शुरुआती संकेतों की पहचान करने और आवश्यक मरम्मत या सुधार के उपाय सुझाने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से की जाएगी, जो सामान्य वित्तीय नियम (GFR-2017) और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के दिशानिर्देशों के अनुरूप होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयन और मूल्यांकन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।

PWD द्वारा तैयार सूची में कुछ फ्लाईओवरों को उनकी संरचनात्मक स्थिति और रखरखाव से जुड़ी शिकायतों के आधार पर शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, नारायणा फ्लाईओवर, मंगोलपुरी फ्लाईओवर और लाजपत नगर-श्रीनिवासपुरी फ्लाईओवर को यात्रियों से मिली शिकायतों और रखरखाव संबंधी मुद्दों के बाद ऑडिट सूची में जोड़ा गया है। इसके अलावा, बंद पड़ी नहर के ऊपर बने एक सड़क संरचना को भी एक्सपेंशन जॉइंट से जुड़ी समस्याओं के चलते चिन्हित किया गया है।

इसी क्रम में, केंद्रीय विद्यालय के पास स्थित एंड्रयूज गंज फ्लाईओवर, जिसे शुरुआती सूची में शामिल नहीं किया गया था, उसे भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाद में ऑडिट में शामिल कर लिया गया है। इस परियोजना के तहत चयनित कंसल्टेंट को फ्लाईओवरों की विस्तृत संरचनात्मक जांच, सर्वे रिपोर्ट तैयार करना, लागत का अनुमान लगाना और तकनीकी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही भविष्य में आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए भी विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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