दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे शिक्षकों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) से बड़ी राहत मिली है। CAT ने 4 अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने और उनकी योग्यता के आधार पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर नियुक्ति करने का निर्देश दिया है। न्यायाधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन करते हुए 2 महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। फैसले से लंबे समय से नियमित नियुक्ति का इंतजार कर रहे कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
30 साल की अधिकतम आयु सीमा के कारण अटकी थी नियुक्ति
केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) की न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य डॉ. आनंद एस. खाती की बेंच ने पिंकी मौर्य एवं अन्य बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) मामले में यह आदेश दिया है। मामला उन कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों से जुड़ा है, जो कई वर्षों से दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में सेवाएं दे रहे थे। हालांकि, नियमित भर्ती प्रक्रिया के दौरान निर्धारित अधिकतम 30 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाने के कारण उनके लिए नियुक्ति का रास्ता बंद हो गया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लंबे समय तक एमसीडी स्कूलों में बतौर कॉन्ट्रैक्ट शिक्षक काम किया है। इसके बावजूद नियमित भर्ती में आयु सीमा के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल पा रहा था। इसी आधार पर उन्होंने आयु सीमा में छूट और नियमित नियुक्ति का रास्ता खोलने के लिए कैट का रुख किया था। मामले की सुनवाई के बाद कैट ने चार अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने और उनकी योग्यता के आधार पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर नियुक्ति करने का निर्देश दिया है। संबंधित प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करने का आदेश दिया गया है।
अनुभव को माना महत्वपूर्ण
कैट की बेंच ने माना कि इन कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों का कई वर्षों का अनुभव महत्वपूर्ण है। बेंच के अनुसार, ये शिक्षक लंबे समय से उसी श्रेणी के विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं, जिसके लिए नियमित भर्ती की जा रही है। ऐसे में उनके अनुभव और योग्यता को देखते हुए उन्हें भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट का लाभ दिया जाना उचित है। मामले की सुनवाई के दौरान अंतरिम आदेश के तहत चारों अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद भर्ती परीक्षा के उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे में कैट की बेंच के सामने पेश किए गए।
परिणामों की जांच करने पर बेंच ने पाया कि पिंकी मौर्य, अंजू बाला, सरोज बाला और सविता कुमारी मान ने निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल किए हैं। इसके बाद कैट ने चारों के आवेदन स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को उनकी आयु सीमा में छूट देने का निर्देश दिया। बेंच ने अधिकारियों से कहा कि चारों अभ्यर्थियों की योग्यता और अन्य निर्धारित भर्ती शर्तों की पूर्ति के अधीन सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर नियुक्ति पर विचार किया जाए। नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
MCD के 2099 कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को मिल सकती है राहत
कैट के इस फैसले का असर दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत 2099 शिक्षकों पर पड़ सकता है। फैसले को ऐसे शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे अनुभव के बावजूद अधिकतम आयु सीमा पार करने के कारण नियमित भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित रह जाते हैं। बेंच ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल चारों अभ्यर्थियों की नियुक्ति को नई नियुक्ति माना जाएगा। उनकी नियुक्ति भविष्य में उपलब्ध रिक्त पदों के विरुद्ध की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर उनके लिए अतिरिक्त पद सृजित करने का विकल्प भी रखा गया है। कैट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बनाया आधार
कैट की बेंच ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ‘UPSC बनाम डॉ. जमुना कुरुप एवं अन्य’ मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आयु सीमा में छूट के संदर्भ में कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे एमसीडी कर्मचारियों को भी एमसीडी कर्मचारी माना था। कैट ने इसी कानूनी आधार को मौजूदा मामले में महत्वपूर्ण माना। न्यायाधिकरण ने कहा कि यदि किसी भर्ती विज्ञापन में किसी विशेष लाभ को केवल स्थायी या नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं किया गया है, तो सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी होने के आधार पर संबंधित कर्मियों को उस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
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