अमित पांडेय, डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ पुलिस ने एक बार फिर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए आदतन शराब कोचिया विनय मिश्रा को 50 पाव मध्यप्रदेश निर्मित गोवा व्हिस्की और एक एक्टिवा स्कूटी के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) और 36 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

क्या सिर्फ गिरफ्तारी ही काफी है?

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ पहले भी आबकारी अधिनियम और मारपीट से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। लेकिन इस गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा सवाल फिर सामने आ गया है। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ वर्षों से लगातार मामले दर्ज होते रहे हैं, तो क्या सिर्फ गिरफ्तारी ही समाधान है, या उसके पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क तक पहुंचना भी जरूरी है?

बड़े नेटवर्क की चर्चा

स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चर्चा है कि डोंगरगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संगठित तंत्र की तरह संचालित होता है। सूत्रों का दावा है कि शराब की सप्लाई के लिए कई दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से जुपिटर स्कूटर का उपयोग किया जाता है, क्योंकि अन्य मोपेड की तुलना में इसकी डिक्की बड़ी होती है, जिससे अधिक मात्रा में शराब ले जाना आसान होता है। इसके बाद अलग-अलग लोगों के माध्यम से शराब की बिक्री कराई जाती है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने भी इस संबंध में कोई औपचारिक जानकारी जारी नहीं की है।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

कुछ वर्ष पहले करवारी क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध शराब और नकली पैकिंग सामग्री बरामद होने की घटना ने भी बड़े नेटवर्क की आशंका को बल दिया था। उसके बाद भी समय-समय पर अवैध शराब की खेप पकड़ाई, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। यही वजह है कि हर नई कार्रवाई के बाद लोगों के बीच एक ही चर्चा होती है, छोटे-छोटे हिस्से पकड़े जाते हैं, लेकिन यदि वास्तव में कोई बड़ा नेटवर्क मौजूद है, तो उसकी पूरी कड़ी तक कब पहुंचा जाएगा?

यह खबर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल नहीं उठाती। डोंगरगढ़ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और शराब की खेप भी पकड़ रही है। लेकिन व्यवस्था के सामने चुनौती यह है कि जब एक ही तरह के मामलों में बार-बार वही नाम सामने आते हैं, तो केवल गिरफ्तारी से समस्या खत्म नहीं होती। जरूरत उस पूरे तंत्र को खत्म करने की होती है, जो ऐसे कारोबार को दोबारा खड़ा होने का मौका देता है।

अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि ताजा गिरफ्तारी केवल एक और मामला बनकर रह जाती है या फिर जांच आगे बढ़कर उस कथित नेटवर्क तक पहुंचती है, जिसकी चर्चा वर्षों से डोंगरगढ़ में होती रही है।

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