India Retail Inflation: देशवासियों को महंगाई ने जोरदार झटका दिया है। थोक महंगाई के साथ ही खुदरा महंगाई दर भी बढ़ी है। इसका असर है कि आलू–प्याज से लेकर तेल-बिजली तक महंगी हो गई है। भारत में थोक महंगाई (Wholesale Price Inflation- WPI) दर अगस्त में बढ़कर 10% (9.92%) पर पहुंच गई है। जबकि अगस्त में देश की खुदरा महंगाई दर (retail inflation rate) बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 4.45 प्रतिशत थी। यह लगातार आठवां महीना है, जब फुटकर (खुदरा) महंगाई दर बढ़ी है। इसके अलावा, कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के आधार पर मापी जाने वाली खाद्य महंगाई दर भी अगस्त में बढ़कर 5.95% हो गई।

 सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सोमवार को खुदरा महंगाई दर के ताजा आंकड़े जारी किए। महंगाई ने दोनों मोर्चाें ( थोक और खुदरा) दोनों में झटका दिया है।

सरकार की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि साल की पहली छमाही में महंगाई दर के काफी हद तक कम रहने के बाद अब कीमतों का दबाव बढ़ने लगा है। अगस्त में प्राइमरी आर्टिकल्स यानी प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई में कुछ राहत देखने को मिली। इस कैटेगिरी की महंगाई जुलाई के 8.52 फीसदी से घटकर अगस्त में 7.76 फीसदी हो गई। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतों में इसके उलट तेजी आई। व्होलसेल फूड इंफ्लेशन (Wholesale Food Inflation) अगस्त में बढ़कर 7.05 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 6.65 फीसदी थी। 

महंगाई बढ़ाने में फ्यूल एंड पावर सेक्टर का योगदान

महंगाई बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान फ्यूल एंड पावर सेक्टर का रहा। इस कैटेगिरी में महंगाई जुलाई के 20.05 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 22.93 फीसदी हो गई। फ्यूल एंड पावर इंडेक्स भी जुलाई के 105.4 से बढ़कर अगस्त में 108.3 हो गया। ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और दूसरे उद्योगों की लागत भी इससे बढ़ सकती है। मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट (Manufactured Products) की महंगाई भी अगस्त में मामूली बढ़त के साथ 8.37 फीसदी पर पहुंच गई, जो जुलाई में 8.29 फीसदी थी।

प्याज की महंगाई में दोगुना से ज्यादा बढ़ोतरी

अगस्त में प्याज की महंगाई दोगुना से भी ज्यादा बढ़कर 48.27 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 22.54 प्रतिशत थी। पिछले महीने लहसुन की महंगाई भी बढ़कर 43.60 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 35.36 प्रतिशत थी। हालांकि, अदरक की महंगाई जुलाई की तुलना में कम होकर 73.82 प्रतिशत रही। जुलाई में ये 83.57 प्रतिशत थी। इसके अलावा, टमाटर की कीमतों में भी कुछ राहत मिली। पिछले साल अगस्त की तुलना में इस साल अगस्त में टमाटर की कीमतें 31.09 प्रतिशत कम हुईं। जबकि आलू की कीमतों में भी 13.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मार्च में 4% अब करीब 10% कैसे?

मार्च 2026 में WPI महंगाई सिर्फ 3.98% थी। इसके बाद अप्रैल में यह 8.36%, मई में 9.88%, जून में 9.97% और अगस्त में 9.92% हो गई यानी कुछ ही महीनों में थोक महंगाई करीब 4% से बढ़कर लगभग 10% के लेवल पर पहुंच गई है। इसमें एक बड़ा कारण बेस इफेक्ट भी है।

फुटकर महंगाई दर 5.95% रही

सरकार ने 14 सितंबर को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए है। इसके अनुसार खाने-पीने की चीजों की फुटकर महंगाई दर 5.95% रही। रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। यह लगातार तीसरा महीना है जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की गई है।

इस साल, कौन-से महीने में कितनी रही खुदरा महंगाई दर

महीना (2026)खुदरा महंगाई दर (%)
जनवरी 2.75
फरवरी 3.21
मार्च3.40
अप्रैल3.48
मई3.93
जून4.38
जुलाई4.45
अगस्त4.82

RBI को मिली है महंगाई दर 6 प्रतिशत से नीचे रखने की जिम्मेदारी

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर के 5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है। महंगाई दर के दूसरी तिमाही में 4.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ने महंगाई की चिंताओं के बीच हाल ही में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। सरकार ने आरबीआई को महंगाई दर को 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने की जिम्मेदारी दी है। 

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