कुंदन कुमार/पटना। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्य सरकार की विफलताओं को घेरते हुए एक बड़े जन-आंदोलन की घोषणा की है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ आयोजित संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट किया कि महंगाई, बेरोजगारी, संगठित भ्रष्टाचार और लचर विधि-व्यवस्था के विरोध में राजद पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन करेगी।

​आंदोलन की रूपरेखा

राजद ने अपने विरोध प्रदर्शन को दो चरणों में विभाजित किया है:

  • ​प्रथम चरण: 9 जून 2026 को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर धरना।
  • ​द्वितीय चरण: 17 जून 2026 को राज्य भर के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक धरना-प्रदर्शन।

​सरकार पर तीखे हमले

प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार से 72,000 करोड़ रुपये का हिसाब मांगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है। मंडल ने कहा, गरीबों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और अत्यधिक वैट-सरचार्ज ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। राजद ने सरकार को चुनौती दी कि वह भूमिहीनों और बेघर परिवारों की सूची सार्वजनिक करे और यह बताए कि कितने पर्चाधारियों को उनकी जमीन का कब्जा मिला है।

​बकैती, फेकेती और लठैती की सरकार

प्रेस वार्ता के दौरान राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने वर्तमान सरकार को ‘बकैती, फेकेती और लठैती’ वाली सरकार करार दिया। वहीं, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने इसे ‘हिडेन इमरजेंसी’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अडानी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है और गरीबों के प्रति मानवीय संवेदना खो चुकी है। पटना में गरीब परिवारों को बेघर किए जाने की घटना पर उन्होंने कड़ा विरोध जताया।

​संघर्ष की अगली रणनीति

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें डॉ. तनवीर हसन और रणविजय साहू शामिल हैं, ने कहा कि संगठन अपने संघर्ष को और धार देगा। 17 जून के बाद के कार्यक्रम में गिरफ्तारी और अन्य विरोध के तरीकों को शामिल किया जाएगा, जिसकी घोषणा जल्द की जाएगी। राजद ने स्पष्ट किया कि वे जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे और सरकार की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करेंगे। पार्टी ने सरकार से जनता के पैसे और राज्य के विकास के संतुलन पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।