कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की सियासत में मदरसों की जांच का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद कारी सोहैब ने प्रदेश सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे महज एक ‘सियासी स्टंट’ करार दिया है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।
पहले पुरानी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे सरकार
कारी सोहैब ने दो साल पहले हुई मदरसों की जांच का हवाला देते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने पूछादो साल पहले जो जांच हुई थी, उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ? सरकार को पहले उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करना चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार पुरानी जांच का परिणाम बताने के बजाय बार-बार नई जांच की बात कर रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है।
जमीन और संसाधनों की कमी से जूझ रहे मदरसे
राजद एमएलसी ने स्पष्ट किया कि अधिकांश मदरसे अपनी निजी जमीन पर संचालित हो रहे हैं। उन्होंने सदन में भी इस बात को प्रमुखता से उठाया है कि मदरसों में शिक्षकों का भारी अभाव है। सोहैब ने कहा मदरसों के शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलता है। अनुदान की राशि भी समय सीमा के भीतर नहीं पहुंचती है जिससे मदरसों की स्थिति बदहाल हो गई है। सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रही है।
अधिकारियों को कमाई का जरिया दे रही सरकार
कारी सोहैब ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जांच के नाम पर अधिकारियों को खुली छूट दी जा रही है ताकि वे करोड़ों रुपये की अवैध वसूली कर सकें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकारी खजाना खाली है और देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है लेकिन सरकार का पूरा ध्यान विकास के बजाय केवल हिंदू-मुसलमान की राजनीति करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि यह कैसी सरकार है जो असल मुद्दों को दरकिनार कर समाज में विभाजन की लकीर खींचने का काम कर रही है। राजद एमएलसी के इन तीखे बयानों ने शिक्षा विभाग और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। अब देखना यह है कि सरकार इन आरोपों पर क्या सफाई देती है या क्या वह वाकई पुरानी जांच रिपोर्ट पर कोई जवाब पेश करती है।

