अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। रोहतास जिले के संझौली थाना क्षेत्र स्थित तिलई गांव में पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित महादलित परिवार की महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। दो दिन पूर्व पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज के मामले में अब एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। पीड़ितों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘शराब छापेमारी’ के बजाय ‘जमीन कब्जाने की साजिश’ बताया है।
न्याय की गुहार लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंचीं महिलाएं
मंगलवार को तिलई गांव की पीड़ित महिलाएं भारी संख्या में डेहरी स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने रोहतास रेंज के उप-महानिरीक्षक (DIG) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। महिलाओं का आरोप है कि संझौली पुलिस ने पूरी तरह से एकपक्षीय कार्रवाई की है और दबंगों के इशारे पर उनके साथ बर्बरता की है। ज्ञापन के जरिए उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।


क्या है पूरा मामला?
स्थानीय निवासियों और पीड़ित महिलाओं के अनुसार, तिलई गांव में भगवान पांडे नामक व्यक्ति के साथ महादलित परिवारों का लंबे समय से जमीन विवाद चल रहा है। महिलाओं का दावा है कि इसी विवाद को दबाने और उन्हें डराने-धमकाने के लिए स्थानीय पुलिस ने मिलीभगत की है। घटना के दो दिन पहले, पुलिस ने दलित बस्ती में घुसकर बिना किसी महिला कांस्टेबल के मौजूदगी के महिलाओं पर लाठियां बरसाईं, जिसमें कई महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं।
पुलिस का दावा बनाम पीड़ित पक्ष का सच
घटना के तुरंत बाद संझौली पुलिस ने अपना बचाव करते हुए इसे ‘शराब विरोधी छापेमारी’ का नाम दिया था। पुलिस का तर्क था कि गुप्त सूचना के आधार पर शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, अब पीड़ित पक्ष ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। महिलाओं का कहना है कि पुलिस का शराब छापेमारी का तर्क केवल एक ढाल है, ताकि जमीन विवाद के मामले में पीड़ित महादलितों का मुंह बंद कराया जा सके।
जांच की मांग तेज
इस पूरे प्रकरण ने इलाके में पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भी पुलिस के इस बर्बर रवैये की निंदा की है। फिलहाल, डीआईजी कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ितों को निष्पक्ष जांच का भरोसा मिला है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाता है या फिर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जाता है। स्थानीय दलित समाज ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे।

