दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच की जांच में कैंसर की नकली दवाओं की कथित कालाबाजारी का गंभीर मामला सामने आया है। जांच के मुताबिक, मरीजों को करीब 1 लाख रुपये में बेचे जा रहे एवालुमैब इंजेक्शन में कैंसर से लड़ने वाला मूल तत्व मौजूद ही नहीं था। बताया गया है कि इंजेक्शन में सिर्फ पानी भरा हुआ था। पुलिस के मुताबिक, दवा बनाने वाली कंपनी के जरिए इन इंजेक्शनों के सैंपल की जांच जर्मनी की मर्क लैब में कराई गई। जांच में कथित तौर पर पता चला कि इंजेक्शन में कैंसर के इलाज के लिए जरूरी मूल इंग्रीडिएंट की मात्रा शून्य थी।
इस खुलासे के बाद उन मरीजों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने ब्लैक मार्केट से महंगे दाम पर ये इंजेक्शन खरीदे थे। पुलिस मामले में नकली दवा की सप्लाई और इसे मरीजों तक पहुंचाने वाले नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्थान सरकार की योजना के तहत कैंसर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं को भी कथित तौर पर ब्लैक मार्केट में बेचा गया। पुलिस इस एंगल से भी मामले की जांच कर रही है कि सरकारी योजना की दवाएं सप्लाई चेन से बाहर निकलकर किस तरह कालाबाजारी के नेटवर्क तक पहुंचीं।
588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल बरामद
क्राइम ब्रांच ने 20 अगस्त को सात राज्यों में फैले करीब 9 करोड़ रुपये के कथित कैंसर दवा रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया है। मामले में पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में एंटी-कैंसर दवाएं, खाली वायल और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई है।पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, छह खाली वायल और सात खाली दवा के बॉक्स बरामद किए गए। इसके अलावा दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट और करीब 50 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर की दवाएं शामिल हैं। क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार, कथित रैकेट का नेटवर्क सात राज्यों तक फैला हुआ था। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर दवाओं की सप्लाई चेन, इनके स्रोत और मरीजों तक पहुंचने के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी
पुलिस के मुताबिक, कथित कैंसर दवा रैकेट का नेटवर्क दिल्ली-NCR, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य इलाकों तक फैला हुआ था। इस पूरे मामले की जांच 22 जून को मिली एक गुप्त सूचना के बाद शुरू की गई। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में संदिग्ध ठिकानों की पहचान की। इन स्थानों पर गतिविधियों और दवाओं की सप्लाई से जुड़े इनपुट जुटाए गए। पुलिस के अनुसार, 11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ सात टीमों ने दिल्ली और नवी मुंबई में एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान मिले सुरागों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
तीन रास्तों से सिंडिकेट तक पहुंचती थीं कैंसर की दवाएं
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक, कथित कैंसर दवा सिंडिकेट तक दवाओं की सप्लाई तीन अलग-अलग रास्तों से होती थी। जांच में सामने आया है कि नेटवर्क में नकली दवाओं के साथ अस्पतालों और सरकारी संस्थानों से कथित तौर पर बाहर निकाली गई दवाएं भी शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, पहला जरिया गैरकानूनी स्रोतों से खरीदी गई नकली दवाएं थीं। दूसरा, अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी गई दवाओं की कथित हेराफेरी की जाती थी। तीसरे रास्ते के तहत सरकारी संस्थानों और गोदामों से सरकारी सप्लाई की दवाओं को कथित तौर पर बाहर निकाला जाता था। जांच के मुताबिक, इन दवाओं को कथित तौर पर बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों के घरों और दूसरे ठिकानों पर रखा जाता था। इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से दवाओं को आगे सप्लाई किए जाने का आरोप है।
ऐसे होता था कैंसर दवाओं की रीपैकिंग का खेल
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक, कथित गिरोह असली दवाओं के कार्टन और खाली बॉक्स संभालकर रखता था और बाद में इन्हीं का इस्तेमाल रीपैकिंग के लिए किया जाता था। जांच में सामने आया है कि दवाओं की पहचान से जुड़ी जानकारी बदलने के लिए पैकेजिंग के साथ छेड़छाड़ की जाती थी। पुलिस के अनुसार, आरोपियों द्वारा बैच नंबर, MRP और पहचान से जुड़ी अन्य जानकारी एसीटोन जैसे केमिकल की मदद से मिटाई जाती थी। इसके बाद थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन का इस्तेमाल कर दवाओं की नई पैकिंग तैयार की जाती थी। जांच एजेंसी को कथित तौर पर दवाओं और नकदी के लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और डायरी भी मिली हैं। इन दस्तावेजों से नेटवर्क में दवाओं की खरीद, बिक्री और पैसों के लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मी नगर निवासी अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, अभिषेक वर्ष 2022 से दवाओं की खरीद और सप्लाई के काम में शामिल था। पुलिस ने अभिषेक के पास से 4 लाख रुपये बरामद किए हैं, जबकि शुभम कुमार चौधरी के कब्जे से 23 लाख रुपये मिलने की बात कही गई है।
दिल्ली से कई राज्यों तक फैला था कैंसर दवा सिंडिकेट
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, कथित कैंसर दवा सिंडिकेट का नेटवर्क सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था। इसमें नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, झज्जर, फरीदाबाद, मुंबई और हैदराबाद से जुड़े लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों की भूमिका और दवाओं की सप्लाई चेन की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, नोएडा के आनंद कुमार के पास से 337 एंटी-कैंसर वायल बरामद किए गए। वहीं फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि के पास से 108 वायल और करीब 6.5 लाख रुपये नकद मिले। इसके अलावा गुरुग्राम के मयंक गर्ग के पास से 55 एंटी-कैंसर वायल बरामद किए गए हैं। इन बरामदगियों के बाद पुलिस अलग-अलग शहरों में दवाओं की खरीद, स्टोरेज और सप्लाई से जुड़े कनेक्शन खंगाल रही है। इस मामले में 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी और तलाशी की कार्रवाई की गई। अब पुलिस कथित सिंडिकेट के पूरे सप्लाई नेटवर्क और पैसों के लेनदेन का पता लगाने में जुटी है।
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