शिखिल ब्यौहार। भोपाल। मध्यप्रदेश में अब भगवा में हरे रंग की महक दिखाई दे रही है। दरअसल, आरएसएस के अनुषांगिक संगठन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच की नजर राज्य के अल्पसंख्यकों पर है। मुस्लिम मंच प्रदेश में राष्ट्रवादी विचार धारा से जोड़ने के लिए सघन अभियान चलाएगा। अगले सप्ताह से शुरू होने वाले इस अभियान की रूपरेखा भी तैयार कर ली गई है। संघ से मुस्लिमों की दूरी को पाटने की इस कवायद को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है।

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के प्रदेश सह संयोजक तौफीक अहमद ने बताया कि बदलते वक्त से साथ अल्पसंख्यों में भी संघ के प्रति गफलत का नजरीया बदल रहा है। साल दर साल संघ की राष्ट्रवादी सोच से न सिर्फ मुस्लिम जुड़ रहे हैं बल्कि इस विचारधारा के साथ देश की धरा के लिए काम भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें दोमत नहीं कि संघ के साथ राष्ट्र विरोधी विचारधारा ने वैचारिक षडयंत्र किया गया था। मुस्लिम वर्ग इसे समझ चुका है। लिहाजा कुछ परतों को साफ कर संघ से मुस्लिमों को जोड़ने के लिए अभियान शुरू कर रहे हैं। इस अभियान में उज्जैन, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, खंडवा, बुरहानपुर, देवास, शाजापुर, श्योपुर समेत अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में यह अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सदस्यता अभियान के बाद प्रशिक्षण शिविर और संगोष्ठियों का भी आयोजन किया जाएगा।

चुनावी तैयारी में संघ की उल्टी गंगा बह रही, यह एक षड्यंत्र- कांग्रेस

कांग्रेस नेता जितेंद्र मिश्रा ने इस कवायद पर पलटवार करते हुए कहा कि संघ और बीजेपी सिर्फ नफरत के लिए काम करते हैं। संघ के इतिहास से देश वाकिफ है। प्रदेश में अब विधानसभा चुनाव के लिए सभी दल अपने अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। लिहाजा संघ को बीजेपी के खिसकते जनाधार को देखते हुए अल्पसंख्यकों को लेकर षड्यंत्र किया गया है। यह असफल साजिश असम और बंगाल में भी की गई थी। संघ की परिस्थितिवश बहती उल्टी गंगा को प्रदेशवासी समेत अल्पसंख्यक वर्ग जानता है। ऐसी कवायद से किसी भी प्रकार का कोई फायदा नहीं होगा।

राष्ट्र चेतना जागरण का संकल्प है, इस पर ऐतराज क्यों- बीजेपी

बीजेपी ने दावा किया कि संघ राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक संगठन है। लिहाजा तमाम कवायद भी सामाजिक और राष्ट्रवादी होती है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अजय धवले ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को इस पहल पर सवाल खड़े करने का कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह स्वागत योग्य कदम है…मुस्लिम राष्ट्रवाद से जुड़ रहे हैं..कांग्रेस पार्टी पीएफआई और सिमी जैसी संगठनों के साथ होती है…आतंकी विचारधारा और राष्ट्रवादी विचारधारा का यही सबसे बड़ा अंतर है।

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