विकास कुमार/​सहरसा। बिहार में शिक्षक भर्ती के इंतजार में बैठे युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। इसी कड़ी में आज सहरसा में बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं और शिक्षक अभ्यर्थियों ने एक विशाल ‘बेरोजगार आक्रोश मार्च’ निकाला। यह प्रदर्शन जिला परिषद परिसर से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए समाहरणालय के मुख्य द्वार तक पहुंचा जहां युवाओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​प्रमुख मांगें और संघर्ष

​प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के समक्ष अपनी चार सूत्रीय मांगें रखी हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग बीपीएससी TRE-4 का नोटिफिकेशन अविलंब जारी करने की है। इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थी डेढ़ लाख पदों पर शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
​प्रदर्शन में शामिल छात्रों का यह भी कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) में पीटी (PT) और मेंस (Mains) की नई बाध्यता को तत्काल समाप्त किया जाए, क्योंकि इससे भर्ती प्रक्रिया जटिल और लंबी हो रही है। साथ ही, पूर्व में प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं और अभ्यर्थियों पर दर्ज किए गए मुकदमों को बिना शर्त वापस लेने की मांग भी उठाई गई है।

​युवाओं का भविष्य दांव पर

​मार्च का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग और सरकार की सुस्त कार्यशैली के कारण लाखों योग्य युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। अभ्यर्थियों ने कहा कि समय पर नियुक्ति नहीं मिलने से वे मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहे हैं। हमें आश्वासन नहीं, नियुक्ति पत्र चाहिए इस नारे के साथ युवाओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो वे इस आंदोलन को और भी उग्र और व्यापक रूप देंगे।
​समाहरणालय पहुंचकर अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन जिला अधिकारी को सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार के युवा अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और अपनी मांगों को लेकर किसी भी स्तर पर झुकने को तैयार नहीं हैं।