संजय पाटीदार, भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने राजधानी भोपाल में एक प्रेसवार्ता के दौरान केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों, नीट (NEET) परीक्षा घोटाले, केंद्रीय शहरी आवास योजना और कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
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सिंहस्थ के नाम पर भ्रष्टाचार: ‘इंजीनियर, मंत्री और ठेकेदार सब खा रहे हैं पैसा’
सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर बनाए जा रहे 48 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर निर्माण पर सवाल उठाते हुए सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार सिंहस्थ के नाम पर सिर्फ पैसे निकालने का काम कर रही है।
सज्जन वर्मा ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि 48 किलोमीटर के इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का आधा बजट तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा। अगर किसी ईमानदार इंजीनियर को जिम्मेदारी दी जाए तो मौजूदा बजट से आधे खर्च में इससे कहीं बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सड़क बनाई जा सकती है। सरकार ने बजट जानबूझकर इतना बढ़ा-चढ़ाकर बनाया है ताकि इंजीनियर, मंत्री और ठेकेदार मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई को डकार सकें।
री-नीट (RE-NEET) परीक्षा: ‘केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें’
देशभर में चल रहे नीट परीक्षा विवाद और दोबारा परीक्षा (Re-NEET) कराए जाने को लेकर पूर्व मंत्री ने सरकार की नीतियों को संवेदनहीन बताया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा घोटाले के कारण देश के कई होनहार छात्र डिप्रेशन में चले गए और कुछ ने तो आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। अगर यह सुधारात्मक व्यवस्था पहले कर ली जाती, तो मासूमों की जान बच सकती थी। इस धांधली की परछाई केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के घर तक पहुंचती है, इसके बावजूद उन्होंने अब तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है।
नीट परीक्षा में सेना की ड्यूटी क्यों?
नीट और सीबीएसई (CBSE) जैसी बड़ी परीक्षाओं की साख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को अब भ्रष्टाचार का घुन लग चुका है। ऊपर बैठे मंत्रियों को जमीनी हकीकत से कोई सरोकार नहीं है, उन्हें सिर्फ भ्रष्टाचार का पैसा चाहिए। अब इन परीक्षाओं में सेना की ड्यूटी लगाने की नौबत इसलिए आ रही है क्योंकि इस देश में आज भी सिर्फ सेना पर ही लोगों का भरोसा बचा है।
पीएम आवास योजना का हाल: ‘2 साल से खाली पड़े हैं मकान, गिरने लगे खिड़की-दरवाजे’
केंद्रीय शहरी आवास योजना की जमीनी हकीकत पर बोलते हुए वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है लेकिन हकीकत यह है कि जहां ये आवास बनाए गए हैं, वहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण लोग जाने को तैयार नहीं हैं। दो-दो साल से ये मकान खाली पड़े-पड़े जर्जर हो रहे हैं। कई जगह तो खिड़की और दरवाजे तक अभी से टूटकर गिरने लगे हैं।
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कैंसर दवाओं की कीमतों में बड़ा खेल
केंद्र सरकार द्वारा कैंसर की दवाइयों की कीमतों को कम करने के दावों को भी उन्होंने पूरी तरह खोखला बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विज्ञापन देकर दावा करती है कि कैंसर की दवाएं 25% कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं जबकि हकीकत में गरीब मरीजों को आज भी ये दवाएं 50% से अधिक कीमतों पर बाजार में बेची जा रही हैं।

