संभल. संभल हिंसा के मुख्य आरोपी और शाही जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी के सदर एडवोकेट जफर अली ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई पारी की शुरुआत कर दी है. शनिवार रात मुरादाबाद में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता लेने के बाद जफर अली ने संकेत दिए कि यदि पार्टी नेतृत्व कहेगा तो वह 2027 का विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगे. उनके इस कदम से संभल की सियासत में हलचल तेज हो गई है और मुस्लिम वोट बैंक के समीकरण बदलने की चर्चा शुरू हो गई है.
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AIMIM में शामिल होकर चुनाव लड़ने के दिए संकेत
रविवार को मीडिया से बातचीत में जफर अली ने कहा कि उन्होंने जनता की मांग पर AIMIM का दामन थामा है, अगर पार्टी मुझे चुनाव लड़ने का निर्देश देगी तो मैं चुनाव लड़ूंगा, अन्यथा एक कार्यकर्ता और सिपाही बनकर पार्टी की सेवा करूंगा. जफर अली ने यह भी कहा कि वह अपनी कौम के हितों की आवाज उठाते रहेंगे और उन पर लगे हिंसा के आरोप पूरी तरह निराधार हैं.
ओवैसी ने की खुलकर तारीफ
मुरादाबाद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जफर अली की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने “अल्लाह के घर की हिफाजत के लिए जेल जाना मंजूर किया, लेकिन समझौता नहीं किया.” बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से जफर अली की AIMIM नेतृत्व से लगातार नजदीकियां बढ़ रही थीं. इससे पहले भी वह पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के साथ कई मंच साझा कर चुके थे.
संभल सीट पर बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण
संभल विधानसभा सीट पर फिलहाल समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता इकबाल महमूद विधायक हैं. वहीं उनके बेटे सुहैल इकबाल भी 2027 का चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं. ऐसे में यदि AIMIM जफर अली को उम्मीदवार बनाती है तो संभल सीट पर मुस्लिम वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ सकती है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने के आसार हैं.
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संभल हिंसा मामले से जुड़े रहे हैं जफर अली
गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी. पुलिस ने जफर अली को इस मामले का मुख्य आरोपी बताते हुए 23 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिली और वह जेल से रिहा हुए. हिंसा के मामले में दर्ज 12 एफआईआर में 2,750 से अधिक लोगों को नामजद किया गया था और 158 आरोपियों को जेल भेजा गया था. मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी है.


