लाहौर। भारतीय पंजाब से पाकिस्तान गई महिला सरबजीत कौर को देश निकाला देने के मामले में लाहौर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। आज हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस फारूक हैदर ने पाकिस्तानी गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए इसे बड़ी लापरवाही करार दिया।
जस्टिस फारूक हैदर ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अदालत द्वारा आदेश दिए जाने के दो महीने बाद भी गृह मंत्रालय की ओर से रिपोर्ट पेश न करना विभाग की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को दर्शाता है। कोर्ट ने इस मामले में सहायक एडवोकेट जनरल को तलब किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई तक सभी संबंधित विभागों की रिपोर्ट हर हाल में जमा होनी चाहिए।

अदालत को सूचित किया गया कि अब तक तीन विभागों ने अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं, जिनमें से दो ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले, कैबिनेट डिवीजन, गृह मंत्रालय, पंजाब सरकार (पाकिस्तान), डीजी एफआईए, विदेश मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। सरबजीत कौर के वकील अली चंगेजी संधू ने अदालत से मानवीय आधार पर मामले की जल्द सुनवाई करने की विनती की थी। उन्होंने दलील दी कि मामला वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है और इसे कानूनी व मानवीय दोनों दृष्टिकोणों से देखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए मामले को प्राथमिकता दी है।
- कैट की स्थायी बेंच नहीं होने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को तीन सप्ताह में शपथपत्र पेश करने का निर्देश
- मुआवजे के खिलाफ अपील में 389 दिन की देरी, हाईकोर्ट ने पंजाब रोडवेज पर लगाया 38 हजार रुपये का जुर्माना
- 51,100 वेतन मांगने पर फुटबॉल कोच की स्कूल में एंट्री बंद! भवंस प्रॉमिनेंट स्कूल पर आरोप, कई जगह शिकायत के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
- DEO के खिलाफ लामबंद कर्मचारी संघ, दुर्व्यवहार और मनमानी के आरोपों पर आंदोलन की चेतावनी
- इंदौर में साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट का बड़ा खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार: करोड़ों के फ्रॉड की आशंका, गुजरात से महाराष्ट्र और तेलंगाना तक जुड़े तार

