पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महेंद्रगढ़ के गांव कुलताजपुर के सरपंच विक्रम सिंह के निलंबन आदेश पर आगामी सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने उच्च अधिकारियों को दो महीने के भीतर इस मामले में नया कानूनन फैसला लेने का निर्देश दिया है।

गुलशन कुमार,महेंद्रगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महेंद्रगढ़ जिले के एक पंचायत प्रतिनिधि को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला सिविल रिट पिटीशन (CWP) संख्या 14047/2026 ‘विक्रम सिंह बनाम हरियाणा सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

हाईकोर्ट ने आदेश को माना त्रुटिपूर्ण

हाईकोर्ट ने गुरुग्राम डिविजन के कमिश्नर द्वारा 16 अप्रैल 2026 को जारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि कमिश्नर का यह आदेश बिना किसी ठोस कारण और स्पष्ट व्याख्या के जल्दबाजी में पारित किया गया था।

‘नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर’ मानकर किया रद्द

न्यायालय ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को “नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर” करार दिया। इसके बाद कोर्ट ने 15 मई 2026 को जारी अपने आदेश के माध्यम से इसे रद्द कर दिया। इस फैसले से निलंबित चल रहे जनप्रतिनिधि को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

कमिश्नर को दो महीने का समय दिया

माननीय उच्च न्यायालय ने गुरुग्राम के डिविजनल कमिश्नर को मुख्य अपील पर कानून के अनुसार विचार करने को कहा है। इसके लिए उन्हें दो महीने की समय-सीमा दी गई है। इस अवधि के भीतर ही उन्हें नया और तर्कसंगत निर्णय लेना होगा।

पुराने निलंबन आदेश पर भी लगी रोक

इसके साथ ही अदालत ने महेंद्रगढ़ के डिप्टी कमिश्नर द्वारा 3 दिसंबर 2025 को जारी मूल निलंबन आदेश पर भी रोक बढ़ा दी है। यह रोक मामले की अगली सुनवाई होने तक जारी रहेगी। इससे सरपंच को अपने पद पर काम करने का दोबारा मौका मिल सकता है।

एडवोकेट जनरल कार्यालय ने दी सूचना

हरियाणा के एडवोकेट जनरल कार्यालय ने इस न्यायिक आदेश की प्रति संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दी है। इसमें गुरुग्राम के डिविजनल कमिश्नर, महेंद्रगढ़ के डीसी और नारनौल के बीडीपीओ शामिल हैं। आदेश में हाईकोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।

सरपंच ने लगाए राजनीतिक साजिश के आरोप

राहत मिलने के बाद सरपंच विक्रम यादव (विक्रम सिंह) ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नारनौल के एसडीएम द्वारा की गई जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया गया। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई के पीछे कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों का हाथ बताया है।