अविनाश श्रीवास्तव, सासाराम। शहर के कोचस थाना क्षेत्र अंतर्गत भगिरथा गांव में भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव की खुशी उस समय मातम में बदल गई जब एक छह साल के मासूम बच्चे की सांस की नली में माला का मोती फंसने से मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

​कान्हा का रूप सजाना पड़ा भारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, भगिरथा गांव निवासी विमलेश यादव के छह वर्षीय पुत्र आर्यन को परिजनों ने श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान का स्वरूप देने का फैसला किया था। परिवार ने बड़े ही उत्साह के साथ बच्चे को कान्हा वाले विशेष वस्त्र पहनाए और उसके श्रृंगार के लिए गले में मोतियों की सुंदर माला भी डाली। बच्चा भगवान के रूप में बेहद प्यारा लग रहा था और घर में उत्सव का माहौल था। इसी दौरान खेल-खेल या नादानी में बच्चे ने गले में पहनी गई मोतियों की माला का एक मोती मुंह में ले लिया और गलती से उसे निगल गया।

​सांस की नली में फंसा मोती

मोती निगलते ही वह बच्चे के गले की श्वासन नली यानी विंडपाइप में जाकर बुरी तरह फंस गया। मोती के फंसने से बच्चे को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगी और देखते ही देखते उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। अचानक हुई इस आपात स्थिति को देखकर परिवार के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में पिता विमलेश यादव और अन्य ग्रामीण बच्चे को लेकर कोचस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, ताकि समय रहते उसकी जान बचाई जा सके।

​अस्पताल में डॉक्टरों के तमाम प्रयास रहे असफल

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर अजीत कुमार ने बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए तुरंत इलाज शुरू किया और गले में फंसे मोती को बाहर निकालने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। हालांकि, मोती श्वासन नली में इतनी गहराई और बुरी तरह से फंसा हुआ था कि तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान ही मासूम आर्यन ने दम तोड़ दिया।

​परिजनों में कोहराम और गांव में छाया मातम

अस्पताल में डॉक्टर द्वारा बच्चे को मृत घोषित किए जाने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। इकलौते या लाडले बेटे की इस अचानक और अकाल मौत से माता-पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां और पिता दोनों बार-बार सुध-बुध खोकर बेहोश हो रहे थे, जिन्हें ढांढस बंधाने के लिए आसपास के रिश्तेदार और ग्रामीण लगातार मशक्कत करते नजर आए। इस दिल दहला देने वाली घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। एक तरफ जहां पूरा देश कृष्ण जन्मोत्सव के उल्लास में डूबा था, वहीं इस परिवार के लिए यह दिन जीवन का सबसे काला और कालातीत दर्द दे गया। इस दुर्घटना के बाद पूरे भगिरथा गांव में चूल्हे तक नहीं जले और हर आंख नम दिखाई दी।