अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। बिहार के सासाराम स्थित नगर थाना क्षेत्र में एक निजी तालाब को लेकर उपजा विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। कंपनी सराय मोहल्ले में स्थित करीब 19 कट्ठा से अधिक क्षेत्रफल वाले इस ऐतिहासिक तालाब के मालिकाना हक और इसके स्वरूप में बदलाव को लेकर स्थानीय मालिक और एक आरजेडी नेता के बीच तीखी तनातनी बनी हुई है।

​क्या है पूरा मामला?

​यह तालाब करीब 100 साल पुराना है, जो स्थानीय व्यवसायी स्व. मोहन साह का निजी स्वामित्व वाला रहा है। वर्तमान में उनके वंशज गिरीश चंद्र इसके मालिक हैं। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में तालाब का उपयोग बंद पड़ा है। अब मालिक ने इस जमीन को मिट्टी से भरकर इसका व्यावसायिक उपयोग करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए सासाराम के एसडीएम ने भी अनुमति प्रदान कर दी है।

​क्यों हो रहा है विरोध?

​जमीन के मालिक गिरीश चंद्र का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन पर स्थानीय दबंग प्रवृत्ति के लोग बाधा डाल रहे हैं। वहीं, विरोध का नेतृत्व कर रहे स्थानीय आरजेडी नेता शंकर कुशवाहा का तर्क अलग है। उनका कहना है कि भले ही जमीन निजी हो, लेकिन दशकों से स्थानीय लोग इसका उपयोग सार्वजनिक रूप से करते आ रहे हैं। ऐसे में तालाब को भरकर व्यावसायिक निर्माण करना जनहित में नहीं है और इसका स्वरूप नहीं बदला जाना चाहिए।

​पुलिस की कड़ी नजर और पुराना इतिहास

​यह विवाद महज एक बहस तक सीमित नहीं है। गौरतलब है कि इसी जमीन के मालिकाना हक को लेकर दो साल पहले भी क्षेत्र में मारपीट और गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं। दोबारा बढ़ते तनाव को देखते हुए नगर थाना की पुलिस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। फिलहाल, इलाके में तनाव बरकरार है और प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार सतर्क है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े हुए हैं, जिससे मामला फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है।