सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा है कि विधायक विधानसभा का उपयोग केवल बहस के मंच के रूप में नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के प्रभावी माध्यम के रूप में करें. जनप्रतिनिधियों का जनता के बीच विश्वास और स्वीकार्यता जितनी मजबूत होगी, वे उतनी ही प्रभावी ढंग से अपने क्षेत्र के विकास के लिए कार्य कर सकेंगे.
शनिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) और पश्चिम बंगाल विधानसभा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों के दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाना सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधायक को संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप कार्य करना चाहिए. संविधान केवल अधिकारों का नहीं, बल्कि कर्तव्यों के पालन का भी मार्गदर्शन करता है.
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सतीश महाना ने विधानसभा समितियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विभिन्न समितियां जनहित के मुद्दों पर गंभीरता से काम करती हैं और उनका प्रभावी उपयोग कर जनता की समस्याओं का बेहतर समाधान किया जा सकता है. सदन में सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी ही किसी विधायक की वास्तविक पहचान होती है. सतीश महाना ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की तुलना चार पायों वाली कुर्सी से करते हुए कहा कि यदि एक भी स्तंभ कमजोर होता है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है. इसलिए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका सहित सभी संस्थाओं को संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए.
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सतीश ने महाना ने अपने राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के संसदीय योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके भाषण और संसदीय आचरण नए विधायकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. महाना ने कहा कि अच्छे कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचानी पड़ती है, जबकि गलतियां स्वतः लोगों तक पहुंच जाती हैं. इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण, कार्यशैली और जनसेवा के प्रति हमेशा पारदर्शी और जवाबदेह रहना चाहिए.

