नई दिल्ली। मुहर्रम (Muharram) के अवसर पर शुक्रवार को निकलने वाले ताजिया जुलूस (Tazia procession) को लेकर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस इस बार ड्रोन (drones) के जरिए निगरानी करेगी। अधिकारियों ने बुधवार को जानकारी दी कि जुलूस के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। खासकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। पुलिस के अनुसार, जुलूस के दौरान 2 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।

इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम के 10वें दिन को ‘आशूरा’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में इमाम हुसैन की याद में ताजिया जुलूस निकाले जाते हैं। इतिहास के अनुसार, 680 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके कई करीबी साथियों को इराक के करबला में इसी दिन शहीद कर दिया गया था। यह घटना इस्लामी इतिहास में एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक अध्याय मानी जाती है, जिसे न्याय और बलिदान के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। इस साल ‘आशूरा’ शुक्रवार को मनाया जा रहा है।

ताजिया जुलूस को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंजताम

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में जुलूस निकाले जाते हैं, लेकिन बड़े जुलूस मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी दिल्ली और पुरानी दिल्ली क्षेत्रों में आयोजित होते हैं। इन्हीं संवेदनशील इलाकों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष योजना तैयार की है। अधिकारियों ने बताया कि जुलूस के शांतिपूर्ण आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रतिष्ठित लोगों और अमन कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकें भी की गई हैं। इन बैठकों का उद्देश्य आपसी समन्वय बनाए रखना और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचना है।

1100 पुलिसकर्मी और ड्रोन-फेशियल रिकग्निशन से निगरानी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राहुल अलवल ने बताया कि इलाके में जुलूस के दौरान करीब 1100 स्थानीय पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय से सुरक्षा बलों की 20 कंपनियों की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि भीड़ पर नजर रखने के लिए 14 ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जुलूस की गतिविधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके। इसके अलावा आपराधिक या संदिग्ध तत्वों की पहचान के लिए चेहरा पहचानने वाली (फेशियल रिकग्निशन) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

उत्तर दिल्ली के डीसीपी राजा बंठिया ने बताया कि जुलूस के दौरान निगरानी के लिए पर्याप्त संख्या में ड्रोन, फोटोग्राफर और वीडियोग्राफर तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चेहरा पहचानने वाली तकनीक (फेशियल रिकग्निशन सिस्टम) का भी उपयोग किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के तहत 5 सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), 37 निरीक्षक और 924 अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की अन्य इकाइयों से दो कंपनियां और बाहरी बल से एक कंपनी को भी सुरक्षा ड्यूटी में लगाया जाएगा।

अमन कमेटी के सदस्यों के साथ हुईं बैठकें

अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, तकनीकी निगरानी और स्थानीय समन्वय के जरिए व्यवस्था को मजबूत किया गया है। उत्तर दिल्ली के डीसीपी राजा बंठिया ने बताया कि थाना और जिला स्तर पर अमन कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकें की गई हैं और उनसे अनुरोध किया गया है कि जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों। उन्होंने कहा कि सभी थानों में पर्याप्त संख्या में रिजर्व पुलिस कर्मियों को तैनात रखा जाएगा ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। वहीं, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राहुल अलवल के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों में बैरिकेडिंग की जाएगी और त्वरित कार्रवाई टीम (QRT) के साथ दंगा नियंत्रण उपकरणों से लैस अतिरिक्त बल भी तैनात रहेंगे। इसके साथ ही स्वयंसेवकों को भी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा ताकि भीड़ प्रबंधन में सहायता मिल सके।

थानेदार से लेकर DCP स्तर तक 21 बैठकें

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राहुल अलवल ने बताया कि जुलूस को सुचारू रूप से निकालने के लिए अमन कमेटियों, भाईचारा समितियों, केबल ऑपरेटरों और क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों के साथ थाना स्तर से लेकर डीसीपी स्तर तक कुल 21 बैठकें की गई हैं। इन बैठकों का उद्देश्य जुलूस के दौरान शांति और आपसी सहयोग सुनिश्चित करना है। वहीं, ताजिया जुलूस आयोजित करने वाले संगठन ‘अंजुमन ताजियादरान’ के मुख्य संरक्षक परवेज़ नूर ने मीडिया को बताया कि मध्य दिल्ली में पुलिस के साथ समन्वय बैठकें हुई हैं और संगठन की ओर से स्वयंसेवकों को हर ताजिए के साथ तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक जुलूस के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करेंगे।

आशूरा जुलूस दोपहर 3 बजे निकलेगा

आयोजन समिति ‘अंजुमन ताजियादरान’ के मुख्य संरक्षक परवेज़ नूर ने बताया कि इस बार जुलूस जुमे की नमाज़ के बाद दोपहर 3 बजे निकाला जाएगा। उन्होंने बताया कि एक ताजिए के साथ लगभग 10 स्वयंसेवक तैनात रहते हैं और इस बार करीब 50 से 60 ताजिए जुलूस में शामिल होंगे। शुक्रवार को आशूरा पड़ने के कारण नमाज़ के बाद जुलूस निकाला जाएगा। परवेज़ नूर के अनुसार, जुलूस दो अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ेगा। एक जुलूस जामा मस्जिद से शुरू होकर अजमेरी गेट की ओर जाएगा, जबकि दूसरा जुलूस पुल बंगश के पास बेरी वाले बाग से शुरू होकर कुतुब रोड होते हुए पहाड़गंज पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि आगे चलकर दोनों जुलूस एक साथ मिलकर जोर बाग स्थित स्थानीय करबला की ओर रवाना होंगे, जहां जुलूस का समापन होगा।

पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि जुलूस के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात रहेगा और संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। अधिकारी के अनुसार, पूर्वी दिल्ली, शाहदरा और उत्तर-पश्चिम दिल्ली में भी ताजिया जुलूस को लेकर अमन कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकें की गई हैं। इन बैठकों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर समन्वय बढ़ाना और जुलूस के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकना है।

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