हेमंत शर्मा, इंदौर। हीरानगर थाना एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। कथित फर्जी प्लास्टर कांड के बाद अब एलएलबी कर रहे स्टूडेंट्स के साथ मारपीट, पैसे मांगने और उन्हें रातभर थाने में बैठाए रखने का मामला सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम में अब एक और बेहद गंभीर आरोप जुड़ गया है—पुलिस ने स्टूडेंट्स को थाने में बैठाकर रखा, लेकिन उनके परिजनों को इसकी जानकारी तक नहीं दी।आरोप है कि परिवार के लोग अपने बच्चों से संपर्क नहीं होने पर परेशान होते रहे। उन्हें बच्चों के साथ क्या हुआ, वे कहां हैं और पुलिस ने उन्हें कहां रखा है, इसकी जानकारी नहीं दी गई। परिजन बच्चों की तस्वीरें लेकर अलग-अलग स्थानों पर उनकी तलाश करते रहे, जबकि आरोप है कि स्टूडेंट्स पुलिस के कब्जे में थाने में बैठे थे।

बच्चे थाने में बैठे थे, परिजन बाहर तलाशते रहे!

यह इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू बनकर सामने आया है।स्टूडेंट्स के मुताबिक तीनों युवकों को पुलिस ने थाने पर बैठाकर रखा था। लेकिन परिवार वालों को यह नहीं बताया गया कि उनके बच्चे पुलिस के पास हैं। ऐसे में परिजन उन्हें तलाशने के लिए अलग-अलग जगहों पर भटकते रहे। परिजन बच्चों की फोटो लेकर उनकी तलाश करते रहे, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं मिली कि उनके बच्चे हीरानगर थाने में ही बैठे हुए हैं। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस ने परिजनों को सूचना क्यों नहीं दी? अगर स्टूडेंट्स पुलिस के पास थे तो परिवार को इसकी जानकारी देना जरूरी क्यों नहीं समझा गया?

पुलिस सहायता केंद्र या ‘सेटिंग सेंटर’?

हीरानगर थाना क्षेत्र में बने पुलिस सहायता केंद्र की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है।आरोप है कि थाने ले जाने से पहले लोगों को इसी सहायता केंद्र पर बैठाया जाता है। यहीं कथित तौर पर मामले को ‘सेट’ करने की कोशिश होती है। सेटिंग हो गई तो मामला वहीं खत्म और नहीं हुई तो थाने पहुंचाकर कार्रवाई की जाती है।

सुरक्षा समिति के लोगों पर पाइप-डंडों से पिटाई का आरोप

मामला गुजराती कॉलेज से एलएलबी कर रहे राज पाठक, अभिराज पाठक, प्रियांशु और आदित्य कौशल से जुड़ा बताया जा रहा है।आरोप के मुताबिक तीन युवक देर रात 1:00 बजे बाइक से जा रहे थे, तभी सुरक्षा समिति के लोगों ने उन्हें रोका। घर पर फोन लगाने के लिए युवकों ने फोन निकालने की कोशिश की तो उनके साथ कथित तौर पर पाइप और डंडों से मारपीट की गई।मारपीट के बाद उन्हें पुलिस के हवाले किया गया और आरोप है कि उन्हें हीरानगर थाने में रातभर बैठाकर रखा गया। और हुड़दंग करने के मामले में जेल भेज दिया।

30 हजार रुपये मांगने का आरोप, दूसरे केस में फंसाने की धमकी?

स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि थाने पर उनसे दूसरे मामले में फंसाने के नाम पर पैसे मांगे गए। युवकों के मुताबिक तीनों से कुल 30 हजार रुपये, यानी 10-10 हजार रुपये की मांग की गई।अब यह आरोप भी जांच का विषय है कि आखिर स्टूडेंट्स से पैसे किसने और किस आधार पर मांगे। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला सिर्फ मारपीट का नहीं, बल्कि कथित वसूली और कानून के दुरुपयोग का भी बन सकता है।

सहायता केंद्र के अंदर के वीडियो ने खोली पोल?

स्टूडेंट्स ने पुलिस सहायता केंद्र के अंदर बैठे लोगों के वीडियो भी बनाए, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल और ज्यादा गहरे हो गए हैं।आखिर स्टूडेंट्स को सहायता केंद्र के अंदर क्यों रखा गया? वहां कौन-कौन मौजूद था? उन्हें किसके आदेश पर वहां बैठाया गया? और क्या वहां उनके साथ मारपीट या पैसों की मांग हुई?

पुलिस कमिश्नर से शिकायत, अब जांच पर नजर

स्टूडेंट्स ने पूरे मामले की शिकायत इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह से की है। शिकायत में कथित मारपीट, पैसे मांगने, थाने में रातभर बैठाने और पुलिस सहायता केंद्र पर दोबारा परेशान किए जाने की बात सामने आई है।
इसके साथ ही अब परिजनों को सूचना नहीं देने के आरोप की भी गंभीरता से जांच की जरूरत है।

वही हीरानगर थाना, जहां पहले फर्जी प्लास्टर कांड ने मचाई थी हलचल

यह मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि हीरानगर थाना पहले कथित फर्जी प्लास्टर कांड को लेकर सुर्खियों में रह चुका है।आरोप था कि कुछ आरोपियों को फर्जी प्लास्टर लगाकर पुलिस कार्रवाई से बचाने की कोशिश की गई। यह आरोप भी सामने आया था कि संबंधित आरोपियों को पुलिस वाहन से उनके गांव तक पहुंचाया गया, ताकि वे विभागीय जांच में वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंच सकें।अब स्टूडेंट्स के साथ कथित मारपीट, पैसे मांगने और परिवार को सूचना नहीं देने के आरोपों ने एक बार फिर हीरानगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

थाना प्रभारी का अलग तर्क—FRV में जाते समय स्टाफ पानी पीने रुका होगा

पूरे मामले को लेकर जब थाना प्रभारी सुशील पटेल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि FRV में ले जाते समय संभव है कि स्टाफ पानी आदि पीने के लिए वहां रुका हो और इसी वजह से युवकों को वहां बैठाया गया हो। युवकों को रात को जब थाने पर लाया था तो थाने पर भी युवकों ने हुड़दंग मचाया था इसके बाद उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गई। 

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