अजयारविंद नामदेव, शहडोल। आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिला एक बार फिर सरकारी योजनाओं में खर्च की गई राशि को लेकर चर्चा में है। जल गंगा संवर्धन अभियान के दौरान ड्राई फ्रूट्स और चाय के कथित भारी-भरकम बिल और सरकारी स्कूलों में पेंटिंग के नाम पर मजदूरों-राजमिस्त्रियों की संदिग्ध संख्या दर्शाकर भुगतान के आरोपों के बाद अब डीएमएफ फंड से तालाब निर्माण के नाम पर लाखों खर्च किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि हाईवे निर्माण के दौरान मुरम निकालने से बने गहरे गड्ढों, पुराने तालाबों और नालों को ही दस्तावेजों में नवीन तालाब निर्माण दर्शाकर 20 से 25 लाख रुपये तक की राशि स्वीकृत और भुगतान कर दिया गया।
मामला जनपद पंचायत जयसिंहनगर के जोरा गांव के पास का बताया जा रहा है। रीवा-शहडोल हाईवे निर्माण के दौरान सड़क किनारे मुरम निकालने से करीब दो से ढाई एकड़ क्षेत्र में बड़ा गड्ढा बन गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी गड्ढे को नया तालाब बताकर करीब 25 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई और खर्च भी दर्शा दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह किसी योजना के तहत बनाया गया जलस्रोत नहीं, बल्कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से बना गहरा गड्ढा है, जिसमें बारिश के दिनों में पानी भर जाता है।
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पुराने तालाब को लेकर सवाल
जयसिंहनगर ब्लॉक की बरना पंचायत के झिरिया गांव में भी पुराने तालाब को लेकर सवाल उठे हैं। जहां करीब 20 वर्ष पुराना तालाब मौजूद है, जिसकी पाल तीन वर्ष पहले टूट गई थी। आरोप है कि इसकी मरम्मत कराने के बजाय पुराने तालाब को ही नवीन तालाब निर्माण बताकर 20 लाख 56 हजार रुपये की स्वीकृति जारी कर दी गई।
किस काम के लिए हुआ भुगतान ?
ब्यौहारी ब्लॉक के तेंदुआ गांव में बाणसागर डैम किनारे स्थित दर्री नाले को लेकर भी विवाद है। जानकारी के अनुसार, नाले की पुलिया और पिचिंग का काम पहले ही डीएमएफ मद से करीब 12 लाख रुपये में कराया जा चुका था। इसके बाद उसी स्थान को सांसद प्रस्ताव के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये की लागत से नवीन तालाब निर्माण बताकर स्वीकृति दिए जाने का आरोप है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब स्थल पर नया तालाब दिखाई नहीं देता, तो भुगतान किस कार्य के लिए किया गया।
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रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2022-23 की कार्ययोजना में डीएमएफ मद से तालाब निर्माण, घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण के 43 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए थे। इनके लिए 7 करोड़ 48 लाख रुपये की स्वीकृति और करीब 5 करोड़ 75 लाख रुपये के बजट का उल्लेख है। पड़ताल में आरोप सामने आए हैं कि नवीन तालाब निर्माण के नाम पर स्वीकृत कई कार्य उन स्थानों पर हुए। जहां पहले से तालाब, नाले या गड्ढे मौजूद थे।
कलेक्टर ने कही जांच की बात
इस मामले में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने कहा है कि डीएमएफ से पुराने तालाब नहीं बनाए जाते। उनके संज्ञान में आए मामलों की जिला स्तर पर टीम गठित कर जांच कराई जाएगी और अनियमितता मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि जमीन पर वास्तव में नए तालाब बने या पुराने गड्ढों और जलस्रोतों को नया नाम देकर सरकारी राशि का भुगतान किया गया।

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