MP Shatrughan Sinha Sailent On TMC Crisis: बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राज्य की सत्ता से बाहर हुई ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी टीएमसी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है। विधायकों के बाद अब सांसदों में भी फूट रड़ गई है। टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों अलग गुट बनाकर एनडीए सरकार को समर्थन करने का फैसला किया है। वहीं बागी सांसदों ने काकोली घोष (Kakoli Ghosh) को अपना चीफ व्हिप चुना है। टीएमसी में मचे बवाल के बीच एक बात जो लोगों को खटक रही है वो है टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का खामोश होना। अपने कड़क अंदाज और ‘खामोश’ डायलॉग से बड़े-बड़ों को चुप करा देने वाले बॉलीवुड एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। बॉलीवुड के ‘शॉटगन’ और दीदी के ‘छेनू’ की खामोशी ने टीएमसी आलाकमान की रातों की नींद उड़ा रखी है।
टीएमसी के भीतर मची रार पर जहां पार्टी का हर छोटा-बड़ा नेता अपनी बात रख रहा है। वहीं दूसरी तरफ आसनसोल से टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। शत्रुघ्न सिन्हा ने खुलकर बागी सांसदों के साथ जा रहे हैं। न ही ममता बनर्जी के साथ खड़े होने का समर्थन कर रहे हैं। शत्रुघ्न की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है?

राजनीति जानकारों के मुताबिक ‘शॉटगन’ अपने सियासी जीवन के इस पड़ाव पर किसी भी तरह की गुटबाजी या पाला-बदल के खेल से दूर रहना चाहते हैं या फिर वेट एंड वाच मोड में है। शत्रुघ्न सिन्हा की एंट्री मार्च 2022 में टीएमसी में हुई थी। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा बाद में आसनसोल से टीएमसी के सांसद चुने गए। ममता बनर्जी ने साल 2022 के उपचुनाव में आसनसोल लोकसभा सीट से उतारकर बंगाल की राजनीति में स्थापित किया। साल 2024 के लोकसभा चुनाव दोबारा से जीतने में सफल रहे। शत्रुघ्न सिन्हा को राजनीतिक रूप से दोबारा ममता बनर्जी ने सियासी संजीवनी दी है। आसनसोल सीट से संसद भेजने का पूरा श्रेय ममता बनर्जी को जाता है। बनर्जी ने गैर-बंगाली नेता को पार्टी के भीतर जो सम्मान और राजनीतिक तरजीह दी, जिसके चलते ही शत्रुघ्न सिन्हा फिलहाल किसी तरह से बागी गुट के साथ नहीं खड़े दिख रहे।
वेट एंड वॉच की स्थिति में शत्रुघ्न सिन्हा
राजनीति पंडितों के मुताबिक शत्रुघ्न सिन्हा का राजनीतिक कद बहुत बड़ा है। वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। देश की राजनीति की नब्ज को बखूबी पहचानते हैं। लिहाजा पूरी तरह खामोशी अख्तियार किए हैं। वह फूंक-फूंककर अपना अगला कदम तय कर रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा का पुराना रिश्ता बीजेपी से रहा है। भले ही पीएम मोदी और अमित शाह की के खिलाफ जाकर बीजेपी छोड़ी थी, लेकिन बीजेपी में आज भी उनके कई पुराने मित्र मौजूद हैं। राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि बंगाल में बीजेपी इस बगावत पर बारीक नजर रखे हुए है।
बागी गुट में कौन-कौन सांसद
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसद है। काकोली घोष का दावा है कि टीएमसी 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग की है। काकोली घोष के साथ 20 सांसदों के होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि अभी तक जो नाम सामने आए हैं, उसमें टीएमसी के 14 सांसद के नाम है. काकोली घोष के साथ में शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक हैं।
ममता बनर्जी के साथ कौन-कौन खड़ा है
टीएमसी में टूट के बाद भी पार्टी सांसदों का एक धड़ा ममता बनर्जी के साथ खड़ा है। ममता के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले सांसदों में अभिषेक बनर्जी, सायनी घोष, कीर्ति आजाद, महुआ मोइत्रा, सौगत रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय और कल्याण बनर्जी हैं।
वेट एंड वॉच वाली स्थिति में सांसदों की संख्या
टीएमसी के बगावत के बीच पार्टी के कई सांसद साइलेंट मोड में खड़े नजर आ रहे हैं, जो न ही बागी गुट के साथ हैं और न ही ममता बनर्जी के पक्ष में दिख रहे। इसमें शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, सजदा अहमद, माला रॉय, प्रतिमा मोंडल, मिताली बेग किसी के पक्ष में खुलकर खड़े नहीं दिख रहे हैं।
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