चैत्र नवरात्रि के दौरान जहां एक ओर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व होता है, वहीं षोडशमातृका की आराधना भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
नवरात्रि के दौरान षोडश मातृकाओं की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले इनका अनिवार्य माना गया है। ये 16 देवियां जीवन के अलग-अलग पहलुओं से जुड़ी हुई हैं। इनकी आराधना से विशेष फल प्राप्त होता है।
- 1.षोडश मातृका में प्रमुख रूप से गौरी को माता पार्वती का स्वरूप माना गया है, जिनकी भक्ति से सुख, सौभाग्य और समृद्धि मिलती है।
- 2.पद्मा को माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है, जिनसे धन, वैभव और संपन्नता की प्राप्ति होती।
- 3.रची इंद्र की पत्नी है। आराधना से शक्ति प्रतिभा और वैभव का आशीर्वाद मिलता है।
- 4.सावित्री को ब्रह्मा जी की शक्ति बताया गया है, जिनकी पूजा से सत्य, तप और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
- 5.विजय को विजय और शुभता की देवी माना गया है।
- 6.जया को संघर्षों में सफलता और सकारात्मकता प्रदान करती हैं।
- 7.देवसेना कार्तिकेय की पत्नी हैं, जिनसे साहस, रक्षा और शक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
- 8.स्वाहा को अग्नि देव की पत्नी माना गया है, जिनकी पूजा से शक्ति और ज्ञान प्राप्त होता है।
- 9.मातृ को समस्त शक्तियों का प्रतीक माना गया है, जो पालन और संरक्षण से जुड़ी हैं।
- 10 लोक माता को संसार की जननी कहा गया है, जिनकी कृपा से जगत की रक्षा और पालन होता है।
- 11.धृति को संयम की अधिष्ठात्री देवी माना गया है, जिनसे धैर्य, स्थिरता और संतुलन मिलता है।
- 12.पुष्टि को समृद्धि और पोषण की देवी कहा गया है। जिनका ध्यान करने से स्वास्थ्य और विकास होता है।
- 13.तुष्टि को आंतरिक शांति की देवी माना गया है, जिनसे संतोष और सुख की प्राप्ति होती है।
- 14.कुलदेवी को वंश की अधिष्ठात्री देवी माना गया है, जिनकी आराधना से परिवार की रक्षा और समृद्धि बनी रहती है।
- 15.स्वधा को श्राद्ध कर्म की अधिष्ठात्री यह पितरों का आशीर्वाद देती है।
- 16.मेधा को बुद्धि की देवी माना गया है। जिनकी आराधना से विवेक, कला और ज्ञान मिलता है।
षोडश मातृका को आदिशक्ति की दिव्य शक्तियां

प्राकट्य की कथा के अनुसार षोडश मातृका को आदिशक्ति की दिव्य शक्तियों के रूप में जाना जाता है। ये सभी फुल देवीय सृष्टि के संचालन, संरक्षण और जीवों की रक्षा में सहायक मानी गई हैं। कथा के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ, तब देवी ने शक्ति संतुलन के लिए इन रूपों को प्रकट किया था। हर षोडश मातृका को विशेष शक्ति, जैसे रक्षा, विजय, समृद्धि, संतोष और ज्ञान का प्रतीक माना गया है।
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