संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। तस्वीर इसलिए भी परेशान करने वाली है, क्योंकि नीट और री-नीट जैसी कठिन परीक्षाओं के बाद चुनिंदा छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलता है, लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें भी सरकारी सिस्टम के आगे संघर्ष करना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद विभागीय बॉन्ड प्रक्रिया पूरी होने में 6 से 7 महीने तक का समय लग जाता है। इस दौरान उनके मूल दस्तावेज मेडिकल कॉलेजों में जमा रहते हैं। इससे कई महीने तक बेरोजगारी की स्थिति बन जाती है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश में मेडिकल ऑफिसरों के 6,513 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 3,777 पदों पर ही नियुक्ति है, जबकि 2,736 पद यानी करीब 42 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों के 5,443 स्वीकृत पदों में से केवल 1,869 पद भरे हैं, जबकि 3,574 पद यानी लगभग 66 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। जूनियर डॉक्टरों का कहना हे कि हमें बॉन्ड प्रक्रिया से कोई दिक्कत नहीं है हम गांव में सेवा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं तो हो।
बॉन्ड प्रक्रिया को सरल-पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग
पीजी कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि हर वर्ष मध्य प्रदेश में लगभग 8 से 10 हजार यूजी और पीजी डॉक्टर पासआउट होते हैं, लेकिन बॉन्ड सेवा से जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण वे लंबे समय तक सेवा शुरू नहीं कर पाते। उनका कहना है कि जब प्रदेश में डॉक्टरों के हजारों पद पहले से खाली हैं, तब विभाग को बॉन्ड प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना चाहिए। ताकि प्रदेश में खाली सरकारी पदों की भर्ती हो सकें।
पीजी कर रहे डॉक्टरों ने कही ये बात
पीजी कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बॉन्ड व्यवस्था से नहीं, बल्कि उसकी लंबी और जटिल प्रक्रिया से परेशानी है। उनका कहना है कि पढ़ाई पूरी होने के बाद बॉन्ड प्रक्रिया पूरी होने में छह महीने या उससे अधिक समय लग जाता है। इस दौरान उनकी डिग्रियां और दस्तावेज मेडिकल कॉलेज में जमा रहते हैं, जिससे वह कहीं भी नौकरी कर पाते हैं। परिणामस्वरूप उन्हें करीब छह महीने तक बेरोजगार रहना पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बॉन्ड के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देनी है तो वहां मूलभूत सुविधाएं, रहने की व्यवस्था और विशेष रूप से महिला डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दिया ये सुझाव
उनका कहना है कि बॉन्ड से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन स्थानों पर पोस्टिंग दी जाए वहां पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं होना चाहिए। पीजी की पढ़ाई कर रहे डॉक्टर ने कहा कि वहीं दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश में पढ़ने आए छात्रों को बॉन्ड प्रक्रिया के कारण उन्हें भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उनका सुझाव है कि पढ़ाई पूरी होते ही डिग्री जारी कर तत्काल बॉन्ड प्रक्रिया पूरी कर पोस्टिंग दे दी जाए, ताकि डॉक्टरों को महीनों तक बेरोजगार न रहना पड़े। मध्यप्रदेश में हजारों विद्यार्थी इस तरह की बॉन्ड नीति की प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय से परेशान हैं।
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