सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में एक कंपनी पर समय से ज्यादा काम कराने का आरोप लगा है। कंपनी में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि जब इस बात का विरोध किया जाता है तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। यह मामला तूल पकड़ता देख कंपनी को अपना फैसला बदलना पड़ा और लेटर पैड पर लिखिति आश्वासन दिया कि अब से सिर्फ 8 घंटे ही ड्यूटी कराई जाएगी।

सिंगरौली के एनसीएल (Northern Coalfields Limited) की मिनी रत्न कंपनी के झींगुरदा, खड़िया, आमलोरी और बीना परियोजना क्षेत्र में काम कर रही कलिंगा कंपनी पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मजदूरों का कहना है कि जहां नियमानुसार 8 घंटे की ड्यूटी होनी चाहिए, वहां उनसे 12 घंटे तक काम कराया जा रहा है। जब ड्राइवर, हेल्पर और अन्य श्रमिकों से बातचीत की गई, तो उन्होंने डर के माहौल का खुलासा किया।

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मजदूरों के मुताबिक, अगर कोई मीडिया के सामने शिकायत करता है, तो उसे तुरंत नौकरी से निकाल दिया जाता है। इस पूरे मामले को लेकर एनसीएल आरसीएमएस एटक के महामंत्री पुष्पराज सिंह ने कर्मचारियों के हित में आवाज उठाई। दबाव बढ़ने पर कलिंगा कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने खुद स्वीकार किया कि वह 8 घंटे के बजाय 12 घंटे काम ले रही है। इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने लेटर पैड पर लिखित आश्वासन भी दिया है कि अब भविष्य में श्रमिकों से केवल 8 घंटे की ड्यूटी ही कराई जाएगी।

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सबसे बड़ा सवाल अब सवाल यह उठता है कि जब ठेका कंपनियां एनसीएल के अधीन काम कर रही हैं, तो बड़े अधिकारी इन पर सख्त कार्रवाई करने से क्यों बच रहे हैं? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर अंदरखाने कोई और खेल चल रहा है। मजदूरों की मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी का सख्ती से पालन हो। श्रमिकों को नौकरी से निकालने की धमकी पर रोक लगे और दोषी कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह बड़ा श्रमिक आंदोलन बन सकता है।

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